धमतरी के जंगलों में मिलती है देश की सबसे महंगी सब्‍जी बोड़ा, कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान

धमतरी. महंगी सब्जियों की बात करें तो सरई बोड़ा  का नाम शायद सबसे ऊपर आएगा. साल में महज डेढ़ हो महीने मिलने वाला बोड़ा अब धमतरी के जंगलों  में पैदा होने लगा है. गावों में ये 300 रुपये किलो, तो आसपास के शहरों में करीब 600 रुपये में मिलता है. जबकि महानगरों में यही बोड़ा 2 हजार किलो तक बिकता है. आखिर ये बोड़ा है क्या और कहां व कैसे पैदा होता है? आइए जानें इसके बारे में सबकुछ.

दरअसल छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला अपने साल के जंगलों के लिए जाना जाता है. अतीत में यहां के जंगलों से अंग्रेज साल के स्लीपर की सप्लाई पूरे एशिया में किया करते थे. धमतरी के इन्ही साल के जंगलो में मिलता है सरई बोड़ा. साल को छत्तीसगढ़ में सरई कहा जाता है. जबकि बोड़ा स्थानीय आदिवासियों का दिया हुआ नाम है.

ये खोज भी आदिवासियों की ही है. वनोपज पर निर्भरता के कारण वनवासी यहां पैदा होने वाले हर खाद्य पदार्थ के बारे में जानते हैं. बोड़ा भी उन्ही में से एक है. बोड़ा दरअसल एक फंगस है. वैज्ञानिकों ने इसका बॉटिनिकल नाम शोरिया रोबुस्टा रखा है. वैसे इसे छत्तीसगढ़ का काला सोना भी कहा जाता है.

एक फंगस है बोड़ा

साल के जंगल में जब पहली बरसात से मिट्टी भीगती है और उसके बाद जो पहली उमस पड़ती है, तब साल वृक्ष के जड़ एक खास तरह का द्रव छोड़ते हैं. फिर जमीन पर गिरे साल के सूखे पत्ते के नीचे ये फंगस बनता है, जिसे बोड़ा कहते हैं. आदिवासी इसे किसी भी लकड़ी की मदद से जमीन से सुरक्षित बाहर निकालते हैं.

इतना महंगा क्यों

अब सवाल ये आता है कि अगर ये फंगस ही है तो इतना महंगा क्यों है. बोड़ा दरअसल पूरी तरह से प्राकृतिक उत्पाद है. इसकी खेती नहीं की जा सकती. ये अपने आप ही पैदा होता है और खास तरह की परिस्थिति में. वैसे ये आदिवासियों को मुफ्त में ही मिलता है और आप खुद साल के जंगलो में चले जाएं तो ये आपको भी मुफ्त में ही मिल सकता है, लेकिन कड़ी मेहनत के बाद क्योंकि ये फंगस है इसलिए वजन में काफी हल्का होता है.

किसी भी चीज की कीमत उसकी डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करती है, तो बोड़ा का स्वाद इसकी बड़ी डिमांड की सबसे बड़ी वजह है. साल के कुछ दिन ही उसका कठिनाई से मिलना और वजन में कम होना, इसकी कीमत को बढ़ा देता है. गांव में इसकी कीमत करीब 300 रुपये किलो तक रहती है, तो करीबी शहर में यही 600 रुपये किलो में बिकता है. जबकि महानगरों तक पहुंच कर इसकी कीमत कई गुना बढ़कर करीब 2 हजार रुपये किलो तक चली जाती है.

पोषण से भरपूर और बीमारियों में सहायक भी है

बोड़ा में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और खनिज तत्व पाये जाते हैं, जो कि इसे पौष्टिक बनाते हैं. वहीं कुपोषण, दिल औ पेट के रोगों में भी ये फायदेमंद माना जाता है, इसिलिए ये बोड़ा जंगल पर निर्भर रहने वाले वनवासियों के भोजन का सदियों से हिस्सा रहा है. हालांकि अब ये महानगरों तक बिकने लगा है.

वनवासी पहली बरसात के बाद बोड़ा इकट्ठा करने जंगलो में जाते हैं. इसके बाद वह कुछ अपने लिए रख लेते हैं और बाकी बेचने के लिये रखते हैं. इससे उन्हें भोजन भी मिलता है और अच्छी खासी कमाई भी कर लेते हैं. वनवासी चंद्र शेखर चींटा बताते हैं कि बोड़ा से भोजन और पैसा दोनों मिल जाता है.

बहरहाल, बोड़ा को लोग सब्जी बना कर खाते हैं. जबकि ये मिट्टी से निकलता है, इसलिए इसे अच्छे से धोने के बाद ही उपयोग में लाना चाहिए. हालांकि ग्रामीण हैरान हैं कि जंगल में सड़े पत्तों के नीचे मिलने वाला बोड़ा आज कल इतना महंगा कैसे हो गया.

हालांकि ग्रामीण भगत राम का कहना है कि इसकी सब्जी बेहद स्वादिष्ट होती है. अगर आपको इस बोड़ा के बेमिसाल स्वाद का लुत्फ लेना है तो यही जून और जुलाई का समय है, लेकिन इसके लिये आपको छत्तीसगढ़ के धमतरी की यात्रा करनी होगी.