रायपुर: साढ़े पांच लंबा, करीब 100 किलो वजनी इस प्राचीन कछुआ की मौत… धार्मिक रीति-रिवाज से लोगों ने किया कछुए का अंतिम संस्कार

रायपुर। राजधानी रायपुर की प्राचीन और धार्मिक मान्यताओं के रूप में माने जाने वाले सरोना मंदिर तालाब में कई सालों से कौतूहल बने कछुए का सोमवार को निधन हो गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, भीषण गर्मी के कारण बीते दिनों से कछुए की हालत खराब थी। अंतत: उसने सोमवार को अंतिम सांस ली। बतादें, इस कछुए की लंबाई साढ़े पांच और चौड़ाई 3 फीट के करीब थी, वहीं करीब 100 किलो वजनी इस कछुआ को 8 लोगों ने मिलकर तालाब से बाहर निकाला। इसके बाद लोगों ने धार्मिक रीति-रिवाज से मंदिर के समीप ही शिव मंदिर परिसर में कछुए का अंतिम संस्कार किया।

नागरिकों ने बताया कि भविष्य में यहां कछुए की यहां समाधि बनाई जाएगी। धार्मिक आस्था के प्रतीक सरोना तालाब की अपनी अलग पहचान और मान्यता है। यहां सास और बहु नाम के दो तालाब हैं। दोनों तालाब एक ही स्त्रोत से जुड़े हुए हैं। बुजुर्गों के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि बारिश के मौसम में बाढ़ के हालात होने पर ये दोनों तालाब एक दूसरे की मदद करते हैं। मान्यता और आस्था की वजह से इन तालाबों में रहने वाली मछलियों और कछुओं को नहीं पकड़ा जाता है।

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प्राचीन शिव मंदिर के कारण भी सरोना का यह स्थान धार्मिक आस्थाओं से ओत-प्रोत है। बताया जा रहा है कि 300 से यह कुछुआ यह रह रहा था। स्थानीय लोगों ने बताया उनकी चार पीढिय़ों से इस कछुए के बारे में सुनते आ रहे हैं। दादा-परदादा बताते थे कि उनके पूर्वजों ने उन्हें बताया था कि तालाब में एक बढ़ा कुछुआ है। यहां के लोग इसकी पूजा करते थे। जब महिलाओं को ये दिख जाता था तो वह इसे बहुत शुभ मानती थीं।

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