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विधायक विनोद ने कलेक्टर को लिखा पत्र कहा- आदिवासी में है आक्रोश, जल्द ही समुचित कार्रवाई के लिए निर्देशित कीजिए?

दिलीप शर्मा : महासमुंद। यह तो सबकों पता है कि छत्तीसगढ़ में सबसे बड़े जमीन घोटाले महासमुंद जिले में हुआ है। बीते शासन काल में जमीन भ्रष्ट्राचार बेलगाम हुआ, जिसे अब कांग्रेस परत दर परत खोल रही है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सत्ता में आते ही आदिवासियों को उनके जमीन वापस दिलाने का वादा भी कर चुके हैं। लोगों को उम्मीद है, कि ऐसे भ्रष्ट्राचारी अब जेल के सलाखे के पीछे होंगे। इसी तारतम्य में महासमुंद विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने बीते दिनों महासमुंद कलेक्टर को पत्र लिखकर कहा है कि आदिवासियो में आक्रोश है, जल्द ही उनके जमीन वापस दिलाने संबंधी संबधित अफसरों को समुचित कार्रवाई के लिए निर्देशित करने की मांग की है।

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दस्तावेज में कूटरचना कर दलालों से मिलीभगत करते हुए 132 आदिवासियों की जमीन को फर्जी सील लगाकर बेचने की अनुमति दे दी। जांच के बाद 107 प्रकरणों में रजिस्ट्री रद्द की गई। लेकिन 23 प्रकरण अभी भी लंबित है। इसी 23 प्रकरण को लेकर महासमुंद विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने पत्र लिखा है। इस मामले में दिलचस्प यह भी है कि 107 प्रकरणों की नामांतरण तो रद्द की गई लेकिन आज तक कई आदिवासियों को प्रशासन कब्जा नहीं दिला पाई।

विधायक ने अपने पत्र में कलेक्टर महासमुंद से कहा है कि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व न्यायालय महासमुंद/पिथौरा में भू-राजस्व संहिता की धारा 170 (ख) के लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा है कि महासमुंद और पिथौरा में लगभग 23 प्रकरण भू-राजस्व के मामले लंबे समय से लंबित है। सक्षम पीठासीन अधिकारी द्वारा आदेश पारित नहीं किया जा रहा है। जबकि प्रकिरयागत सुनवाई पूर्ण कर ली गई है।

उन्होंने कहा है कि उक्त प्रकरणों के संबंध में मेरे कार्यालय द्वारा मौखिक एवं लिखित संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। तदोपंरात भी आदेश नहीं किए गए। जिससे आदिवासियों में आक्रोश व्याप्त है। उक्त प्रकरण पूर्व कलेक्टर महासमुंद के फर्जी हस्ताक्षर से बिक्री पंजीयन एवं नामांतरण किए गए थे। अत: आपसे अनुरोध है कि अनुविभागीय अधिकारी राज्स्व महासमुंद तथा पिथौरा को उपरोक्त प्रकरणों में समुचित आवश्यक कार्रवाई करने हेतु निर्देशित करने का कष्ट करें।

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इस गिरोह के मास्टर माइंड को भी जानिए : इस फर्जीवाड़ा को अंजाम देने में पिथौरा के लक्ष्मीनारायण अग्रवाल (फुन्नु सेठ) जिन्होंने खुद के नाम पर 08 प्लाट, इसके अलावा पत्नी दामाद, बेटी और रिश्तेदार विजय मित्तल 11 प्लाट, मुकेश अग्रवाल, मोहन अग्रवाल, अनिता अग्रवाल, श्याम सुंदर अग्रवाल, कमला बाई, सरस्वती अग्रवाल, पुष्पा अग्रवाल, गोविंद अग्रवाल, आकाश अग्रवाल, प्रशांत अग्रवाल, अमृतलाल अग्रवाल, मनोज अग्रवाल कुल इनके नाम पर कुल 63 आदिवासियों की जमीन को खरीदा गया है। लक्ष्मीनारायण अग्रवाल के दामाद विजय मित्तल के नाम पर 25 से अधिक भूखंड विशाखापट्नम, समता कालोनी रायपुर तथा पिथौरा के तीन अलग-अलग पते में जमीन खरीदी गई है।

जानिए हाइप्रोफाइल मामले को ? : 2005 में महासमुंद से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-53 के लिए फोरलेन डायवर्सन योजना तैयार की गई. 2005 से 2008 के बीच 132 आदिवासी परिवारों की 500 हेक्टेयर जमीनों को गैर-आदिवासियों के नाम पर फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराई गई. इस दौरान सभी 132 आदिवासी परिवारों की जमीनों के साथ शासन से मंजूर 500 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि भी हड़प ली गई. 2013 में विभागीय स्तर पर इस प्रकरण की जांच की गई. इसमें सामने आया कि 2005 से 2008 के बीच तत्कालीन कलेक्टर एसके तिवारी के कार्यकाल के दौरान कलेक्टर के हस्ताक्षर से आदेश जारी होते रहे. हालांकि तत्कालीन कलेक्टर तिवारी का कहना था कि दस्तावेजों में किसी अन्य व्यक्ति ने फर्जी तरीके से उनके हस्ताक्षर किए हैं.

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