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मंदिर में फेकें गए इस फूल से इस युवती बनाती अगरबत्ती और साबून

शनिवार। 05 मार्च। फाल्गुन। शुक्ल पक्ष। तृतीया तिथि

भारत के लोगों को भगवान में पूरे दिल से आस्था है और विभिन्न जाति के लोग अपने भगवान को पूरी श्रद्धा से पूजते हैं। भगवान के पूजन में विविध प्रकार की वस्तुएं उपयोग में ली जाती है जैसे कि अगरबत्ती, श्रीफल (नारियल), फूल वगैरह।

इन सभी वस्तुओं में फूल एक ऐसी पूजा सामग्री है जो दो-तीन दिन तक ताजा रहती है। फिर जब वे मुरझा जाते हैं तब उसे हम कचरे के डिब्बे में फेंक देते हैं। हमारे देश में हर रोज ऐसे कई हजारों टन बासी फूल इकट्ठे होते हैं। ऐसे फूल पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। अगर वे फूल नदी में फेंके जाए तो नदी को भी प्रदूषित करते हैं। क्योंकि फूलों में पाए जाने वाला आर्सेनिक, लेड, कैडमियम और जंतु नाशक एवं पेस्टिसाइड दवाइयां नदी के पानी को प्रदूषित करती है।

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लेकिन आपने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि कचरे के डिब्बे में जाने वाले फूल किसी के लिए बिजनेस बन जाएगा (Stale flowers business) और इन्हीं बासी फूलों से करोड़ों रुपए कमाते (karodo rupaye kamaye) होगे। यकीन नहीं होता ना! पर यह सच है। मैं एक ऐसे व्यक्ति की बात कर रहा हूं जिन्होंने बासी फूलो को इकट्ठे करके उनमें से अगरबत्ती बनाकर बेचते हैं। जी हां, उस व्यक्ति  गुजरात: सूरत की रहने वाली मैत्री जयसवाल मंदिरों में फेंके हुए फूलों को इकट्ठा कर अगरबत्ती और सजावटी सामान बनाती हैं।

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मंदिर में फेकें गए इस फूल से इस युवती बनाती अगरबत्ती और साबून

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