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वास्तु ज्ञान: रांग दिशा में सोने से दांपत्य जीवन में आती है खटास, इस तरह जानकर भी न सोएं

वास्तु ज्ञान: दांपत्य जीवन क्या हमेशा खिट-पिट होती है। छोटी-छोटी बातों पर पति पत्नी में मनमुटाव  होता है. यदि परिवार में अशांति बनी रहती है तो समझ लीजिए की शयनकक्ष में सोने की दिशा में कोई चूक हो रही है.

वास्तु ज्ञान: दांपत्य जीवन में यदि रोज का नोक-झोक होती है। कही वास्तुदोष इसका वजह हो सकता है. वास्तु दोष हमे कई मामलों में अंसतोष उत्तपन्न करता है। कुछ मामलों में हमे वास्तु ज्ञान होना चाहिए है ताकि हमारा गृहस्थी जीवन शानदार रहे। आइये आज हम जीवन का वह सुख और आनंद का स्थल पर ले चलते हैं जहां पर रोज हमारी जीवन कटती है और जीवन की शुरुआत भी यही से होता है…

जानें पति-पत्नी के लिए शास्त्र में हैं कुछ नियम

पति-पत्नी (husband and wife)  के सोने के संबंध में वास्तु शास्त्र में नियम बताए गए हैं. शास्त्र सम्मत तरीके से काम करने से परिवार व दांपत्य में शांति बनी रहती है. दांपत्य जीवन सुखी रहता है और सारे काम बनते चले जाते हैं. पति और पत्नी (husband and wife) एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं और दोनों पहियों के एक साथ चलने पर ही गाड़ी आगे बढ़ती है. आपस में प्यार बढ़ता रहे तो खुशी मिलती है.

वास्तु ज्ञान कहते हैं धार्मिक अनुष्ठान जैसे बच्चे का नामकरण, अन्नप्राशन, विवाह, कन्यादान, यज्ञ पूजा पाठ, जाप कर्म आदि में पत्नी को दाईं तरफ बैठना चाहिए. वैसे पत्नी को वामांगी कहा जाता है जैसे अर्धनारीश्वर के स्वरूप में माता पार्वती और भगवान शंकर हैं. धार्मिक, आध्यात्मिक और पारलौकिक कार्यों को छोड़कर बाकी सांसारिक कार्यों में पत्नी का स्थान बायीं तरफ रहना चाहिए जैसे किसी सभा में, सोते समय, भोजन करते समय, आशीर्वाद ग्रहण करते समय आदि.

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जानिए क्या कहता है वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुखिया अर्थात घर के संचालन कर्ता को हाई एनर्जी जोन में सोना चाहिए. दक्षिण दिशा (south direction) में सोना चाहिए. कमरे छोटे होते हैं उनमें एक डबल बेड डालने के बाद काफी सीमित स्थान बचता है इसलिए यह ध्यान देना जरूरी है कि बेड के किस दिशा में सोएं. यहां पर चार साइड हो सकती हैं.

बेड ऐसा रखना चाहिए कि सोने वाले दंपति का पैर दक्षिण दिशा में न हो दक्षिण दिशा (south direction) में पैर करने से शरीर की ऊर्जा का नाश होता है. वैज्ञानिक तरीके से समझे उत्तर प्लस है और दक्षिण माइनस. इसी तरह हमारे शरीर का पैर माइनस है और सिर प्लस. इसलिए दिशा का माइनस माइनस और प्लस प्लस एक तरफ नहीं होने चाहिए. सबसे अच्छा होता है दक्षिण दिशा (south direction) में सिर करें और उत्तर दिशा में पैर.

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