देश के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आज इस ओर इशारा किया है।

पुरी ने पेट्रोलियम कंपनियों से कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद उनसे उम्मीद है

कि वे तेल की कीमतों में कमी करें।

बता दें कि देश में पेट्रोल डीजल के दाम बीते साल अप्रैल से स्थिर हैं।

बीते एक साल में कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से 140 डॉलर प्रति बैरल होते हुए वापस 75 डॉलर पर आ चुकी हैं।

130 से 140 डॉलर कीमतें पहुंचने पर जहां तेल कंपनियां भयंकर घाटा झेल रही थीं

वहीं बीते 3 से 4 महीने में कीमतें 90 डॉलर से नीचे आने के बाद कंपनियां अपने घाटे को काफी हद तक पाट चुकी हैं।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मैं तेल कंपनियों से अनुरोध करता हूं कि अगर अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें नियंत्रण में हैं और उनकी कंपनियों की अंडर-रिकवरी बंद हो गई है

तो भारत में भी तेल की कीमतें कम करें। कच्चे तेल की कीमत अप्रैल में 102.97 डॉलर प्रति बैरल थी

जो जून में बढ़कर 116.01 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह कीमत इस महीने 78.09 डॉलर तक गिर गई।

पुरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद, हमने तेल की कीमतों का नहीं बढ़ने दिया।

इतना ही नहीं केंद्र ने नवंबर 2021 और मई 2022 को उत्पाद शुल्क घटा दिया था।

लेकिन कुछ राज्य सरकारों ने इसके बावजूद वैट कम नहीं किया और वहां भी अब भी तेल की कीमत अधिक है।

ताजा रिपोर्ट के अनुसार तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 10 रुपये प्रति लीटर का मुनाफा हो रहा है, लेकिन पिछले घाटे की भरपाई करने के लिए खुदरा कीमतों में कमी नहीं की गई है।

इसके साथ ही एक रिपोर्ट में बताया गया कि डीजल की बिक्री पर कंपनियों को 6.5 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।