Wednesday, January 27, 2021
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साढ़ेसाती व ढैय्या का आपके जीवन में कैसा है असर, जानिए यहां लग्नानुसार

शनि Shani का नाम सुनते ही व्यक्ति के मन-दिमाक में एक भय व्याप्त होने लगता है। जब भी शनि का राशि परिवर्तन होता है लोग यह जानने को उत्सुक होते हैं कि उनके लिए यह राशि परिवर्तन क्या फ़ल देने वाला है। शनिदेव Shani न्यायाधिपति है। वे कर्मानुसार मनुष्य को दंड या पारितोषक प्रदान करते हैं। ज्योतिष अनुसार शनि दु:ख के स्वामी भी हैं अत: शनि के शुभ होने पर व्यक्ति सुखी और अशुभ होने पर सदैव दु:खी व चिंतित रहता है।

मेष लग्न-

मेष लग्न में शनि Shani दशमेश व लाभेश होते हैं। दशमेश व लाभेश होने के कारण मेष लग्न में जन्मे जातकों के लिए शनि शुभ फ़लदायक होते हैं। यदि मेष लग्न के जातकों की जन्मपत्रिका में शनि शुभ भावों में स्थित होकर अशुभ प्रभावों से मुक्त हों तो मेष लग्न के जातकों के लिए शनि Shani की साढ़ेसाती व ढैय्या लाभदायक होती है। आगे पूरी जानकारी पढ़ें

वृष लग्न-

वृष लग्न में शनि Shani नवमेश व दशमेश होते हैं। नवमेश व दशमेश होने के कारण वृष लग्न में जन्मे जातकों के लिए शनि Shani शुभ फ़लदायक होते हैं। यदि वृष लग्न के जातकों की जन्मपत्रिका में शनि शुभ भावों में स्थित होकर अशुभ प्रभावों से मुक्त हो तो वृष लग्न के जातकों के लिए शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या लाभदायक होती है। शनि Shani की साढ़ेसाती व ढैय्या की अवधि में वृष लग्न के जातकों को भाग्य का खूब सहयोग प्राप्त होता है। आगे पूरी जानकारी पढ़ें

मिथुन लग्न-

मिथुन लग्न में शनि Shani अष्टमेश व नवमेश होते हैं। अष्टमेश व नवमेश होने के कारण मिथुन लग्न में जन्मे जातकों के लिए शनि Shani सामान्य फ़लदायक होते हैं। यदि मिथुन लग्न के जातकों की जन्मपत्रिका में शनि Shani शुभ भावों में स्थित होकर अशुभ प्रभावों से मुक्त हों तो मिथुन लग्न के जातकों के लिए शनि Shani की साढ़ेसाती व ढैय्या मिश्रित फ़लदायी होती है आगे पूरी जानकारी पढ़ें

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कर्क लग्न-

कर्क लग्न में शनि Shani सप्तमेश व अष्टमेश होते हैं। सप्तमेश व अष्टमेश होने के कारण कर्क लग्न में जन्मे जातकों के लिए शनि Shani अशुभ फ़लदायक होते हैं। यदि कर्क लग्न के जातकों की जन्मपत्रिका में शनि शुभ भावों में स्थित होकर अशुभ प्रभावों से मुक्त हों तो कर्क लग्न के जातकों के लिए शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या अशुभ फ़लदायी होती है किंतु यदि शनि की स्थिति अशुभ भावों में है तो साढ़ेसाती व ढैय्या की अवधि मिश्रित फ़लदायी होती है।आगे पूरी जानकारी पढ़ें

सिंह लग्न-

सिंह लग्न में शनि Shani षष्ठेश व सप्तमेश होते हैं। षष्ठेश व सप्तमेश होने के कारण सिंह लग्न में जन्मे जातकों के लिए शनि Shani अशुभ फ़लदायक होते हैं। यदि सिंह लग्न के जातकों की जन्मपत्रिका में शनि Shani शुभ भावों में स्थित होकर अशुभ प्रभावों से मुक्त हों तो सिंह लग्न के जातकों के लिए शनि Shani की साढ़ेसाती व ढैय्या अशुभ फ़लदायी होती है किन्तु यदि शनि Shani की स्थिति अशुभ भावों में है तो साढ़ेसाती व ढैय्या की अवधि मिश्रित फ़लदायी होती है। आगे पूरी जानकारी पढ़ें

कन्या लग्न-

कन्या लग्न में शनि Shani पंचमेश व षष्ठेश होते हैं। पंचमेश व षष्ठेश होने के कारण कन्या लग्न में जन्मे जातकों के लिए शनि Shani मिश्रित व सामान्य फ़लदायक होते हैं। कन्या लग्न के जातकों के लिए शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या का पूर्वाद्धकाल सफ़लतादायक होता किन्तु उत्तरार्द्ध काल हानिकारक व कष्टकारक होता है। अंतिम रूप से कन्या लग्न के जातकों के लिए शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या मिश्रित फ़लदायी होती है।आगे पूरी जानकारी पढ़ें

तुला लग्न-

तुला लग्न में शनि Shani चतुर्थेश व पंचमेश होते हैं। चतुर्थेश व पंचमेश होने के कारण तुला लग्न में जन्मे जातकों के लिए शनि Shani बहुत ही शुभ फ़लदायक होते हैं। यदि तुला लग्न के जातकों की जन्मपत्रिका में शनि Shani शुभ भावों में स्थित होकर अशुभ प्रभावों से मुक्त हों तो तुला लग्न के जातकों के लिए शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या बहुत ही शुभ फ़लदायी होती है। आगे पूरी जानकारी पढ़ें

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वृश्चिक लग्न-

वृश्चिक लग्न में शनि Shani तृतीयेश व चतुर्थेश होते हैं। तृतीयेश व चतुर्थेश होने के कारण वृश्चिक लग्न में जन्मे जातकों के लिए शनि Shani सामान्य फ़लदायक होते हैं। वृश्चिक लग्न के जातकों के लिए शनि की साढ़ेसाती मिश्रित फ़लदायी होती है। इस अवधि में उनमें अतीव साहस का संचार होता है। भाई-बहनों से विवाद की संभावनाएं बनती हैं। आगे पूरी जानकारी पढ़ें

धनु लग्न-

धनु लग्न में शनि Shani द्वितीयेश व तृतीयेश होते हैं। द्वितीयेश व तृतीयेश होने के कारण धनु लग्न में जन्मे जातकों के लिए शनि Shani अशुभ फ़लदायक होते हैं। धनु लग्न के जातकों के लिए शनि मारक भाव के स्वामी होने के कारण मारकेश भी होते हैं। यदि धनु लग्न के जातकों की जन्मपत्रिका में शनि Shani शुभ भावों में स्थित हैं तो उनके लिए साढ़ेसाती व ढैय्या की अवधि बेहद कष्टकारक व पीड़ा देने वाली होती है।आगे पूरी जानकारी पढ़ें

मकर लग्न-

मकर लग्न में शनि Shani लग्नेश व द्वितीयेश होते हैं। लग्नेश व द्वितीयेश होने के कारण मकर लग्न में जन्मे जातकों के लिए शनि Shani मिश्रित फ़लदायक होते हैं। मकर लग्न के जातकों के लिए शनि मारक भाव के स्वामी होने के कारण मारकेश भी होते हैं। किन्तु लग्नेश होने से शुभ भी होते हैं। मकर लग्न के जातकों के लिए शनि Shani की साढ़ेसाती व ढैय्या मिश्रित फ़लदायी होती है। साढ़ेसाती के पूर्वाद्धकाल में उन्हें लाभ होता है।आगे पूरी जानकारी पढ़ें

कुंभ लग्न-

कुंभ लग्न में शनि Shani व्ययेश व लग्नेश होते हैं। लग्नेश व द्वितीयेश होने के कारण कुंभ लग्न में जन्मे जातकों के लिए शनि Shani मिश्रित फ़लदायक होते हैं। कुंभ लग्न के जातकों के लिए शनि लग्नेश होने से शुभ भी होते हैं। कुंभ लग्न में जातकों के लिए शनि की साढ़ेसाती अपेक्षाकृत शुभ होती है। आगे पूरी जानकारी पढ़ें

मीन लग्न- 

मीन लग्न में शनि Shani लाभेश व व्ययेश होते हैं। लाभेश व व्ययेश होने के कारण मीन लग्न के जातकों के लिए शनि Shani शुभ होते हैं। यदि मीन लग्न के जातकों की जन्मपत्रिका में शनि शुभ भावों में स्थित होकर अशुभ प्रभावों से मुक्त हैं तो उनके लिए साढ़ेसाती व ढैय्या की अवधि बहुत लाभदायक सिद्ध होती है। इस अवधि में उन्हें अतीव धनलाभ होता है। उनकी आय में बढ़ोत्तरी होती है। उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है।आगे पूरी जानकारी पढ़ें

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