नैना ने जब तीन बरस बाद सुनी अपनों की आवाज : 16 वर्षीय नैना को दिव्यांग दिवस पर मिला श्रवण यंत्र

सुकमा। विश्व भर में 3 दिसम्बर को मनाए जाने वाले दिव्यांग दिवस ऐसे तो हर दिव्यांग के लिए एक महत्वपूर्ण दिन होता है, पर सुकमा की 16 वर्षीय बालिका नैना नाग के जीवन में यह दिन अत्यंत लाभकारी रहा। लगभग तीन बरस के कठिनाई भरे जीवन के बाद अब नैना अपनी आँखों में कैद सपने को साकार करने में मजबूत हुई है। तीन वर्षों के बाद अपने परिजनों की आवाज स्पष्ट सुनने पर नैना की आँखों में खुशी के आँसू और चेहरे पर मुस्कान है। पहली नजर में नैना को कोई भी व्यक्ति सामान्य ही आंकेगा, पर नैना असल में श्रवण बाधित बालिका है।

जो आज फिर से खुलें आसमां में अपने सपनों, अपनी इच्छाओं को पंख लगाने में सक्षम हुई है। वह अपनी पढ़ाई पूरी कर एक बेहतर मुकाम हासिल करने की चाहत रखती है।गोंगला के अंबिकापारा निवासी मुन्ना नाग की सुपुत्री नैना नाग बचपन से पढ़ाई, खेलकूद के साथ घर के कामों में भी निपुण रही है। किन्तु तीन बरस पहले नैना के हँँसते-खेलते जीवन में मानो ग्रहण लग गया। नैना की बहन कामिनी ने बताया की तीन बहनों में मंझोली नैना को तीन बरस पहले खेलते समय सिर पर अंदरुनी चोट लगी थी, जिसके कारण उसकी श्रवण क्षमता समय के साथ दुर्बल होती चली गई।

एक वक्त ऐसा आया कि नैना की श्रवण क्षमता लगभग न्यून हो गई। रोजी मजदूरी कर घर चलाने वाले मुन्ना नाग के लिए अपनी होनहार बिटिया के जीवन में आए इस असमय आहत को झेलना जितना मुश्किल रहा उससे कई अधिक कठिनाई ईलाज में हुई। ईलाज के लिए नैना को जिला चिकित्सालय में लाया गया जहाँ से उसे बेहतर परामर्श के लिए जगदलपुर रिफर किया। डाक्टरों ने ऑपरेश्न की आवश्यकता बताई पर आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण नैना का ईलाज संभव नहीं हुआ।

श्रवण क्षमता दुर्बल होने के कारण छोड़नी पड़ी पढ़ाई

नैना के मामा ने बताया कि वह कुम्हाररास के पोटाकिबिन आश्रम में अध्ययनरत् थी। कक्षा 6वीं में खेल दौरान चोटिल होने के कारण उसे सुनने में परेशानी होने लगी, सुनने में समस्या के चलते नैना के लिए शब्दों को समझना बड़ी चुनौती रही, अक्षरों को पढ़ने में तो उसे कोई समस्या नहीं होती किन्तु उच्चारण समझ ना पाने के कारण उसे कक्षा में पढ़ाए पाठ स्मरण नहीं रहते। समय के साथ उसे अच्छे से बोलने और सुनने में परेशानी बढ़ने लगी, कम उम्र में ही सुनने में असक्षम हो जाने से वह बहुत ही नाखुश रहा करती थी और उसने अपने आगे की पढ़ाई कि उम्मीद पुरी तरह से छोड़ दी। बड़ी मुश्किल से 7 वीं एवं 8वीं कक्षा तक पढ़ाई पूर्ण करने के बाद पढ़ाई छोड़ घर के कामों में हाथ बटाने लगी।

जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र व समाज कल्याण विभाग से मिला सहयोग

जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र के सुकमा फिल्ड कॉडिनेटर ने नैना नाग का जानकारी गोंगला के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से प्राप्त किया और उनके परिवार वाले की सहमति से जिला दिव्यांग पुनर्वास के तहत दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया गया। नैना को 40 प्रतिशत दिव्यांगता है। तत्पश्चात् समाज कल्याण विभाग और जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र सुकमा के द्वारा विगत 3 दिसम्बर 2021 को विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर नैना को श्रवणयंत्र प्रदान किया गया। श्रवणयंत्र की सहायता से वह सुनने में सक्षम हो गयी है और अभी वर्तमान में वह आगे पढ़ाई पूरी कर एक सुनहरा भविष्य गढ़ने की कामना करती है।

Back to top button