दुनिया में सम्मान उसी का होता है, जो प्रेम के साथ पराक्रम भी रखता है। जीवन में प्रेम आपकी पहचान बने और शक्ति, आपका पहरेदार हो। प्रेम और शक्ति को लेकर एक कथा याद आती है कि शुरुआती दौर में एक बार बलि के लिए पशु की तलाश होने लगी। प्रश्न उठा कि क्या शेर की बलि चढ़ाई जाए। स्पष्टत: उत्तर मिला कि नहीं, शेर की बलि नहीं चढ़ाई जा सकती। पर क्यों, निष्कर्ष निकला कि बलि का उद्देश्य कभी भी भय नहीं, विनय और समर्पण रहा है। शेर न तो किसी के आगे झुकता है और न ही किसी की सत्ता का भय मानता है। इसलिए यह संभव नहीं है। बलि हमेशा बकरे की ही चढ़ाई गई, क्योंकि बकरा कभी कोई प्रतिकार नहीं करता, पलटकर खड़ा नहीं होता। इसी आधार पर ही तो यह कहा गया है कि बलवान का बांका हो न सका, बकरे ही बलि चढ़ाए गए।
यह कहानी शेर और बकरे की ही नहीं, मनुष्य के दो अलग-अलग स्वभावों की भी है। पहला वह, जो दब जाता है। और दूसरा वह, जो झुककर सम्मान देता है पर टूटकर नहीं। आशय यह कि जीवन में यदि कोई सुखपूर्वक रहना चाहता है, सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीना चाहता है, तो उसे शेर की तरह रहना होगा। श्रीमद्भागवत में आपने पढ़ा-सुना होगा कि कृष्ण का जीवन भी शेर की तरह स्वाभिमानयुक्त, शांत और स्पष्ट सीमाओं वाला रहा है। शेर जंगल का राजा इसलिए नहीं है कि वह सबसे अधिक हिंसा करता है, बल्कि इसलिए कि वह स्वयं को जानता है, अपनी सीमाओं का सम्मान करता है और किसी के अन्याय को सहज स्वीकार नहीं करता। उसके आस-पास कोई अनावश्यक बदतमीजी करने की हिम्मत नहीं करता, क्योंकि यह स्वभाव ही बताता है कि वह शांत है, पर असहाय नहीं।
भगवान कृष्ण कहते हैं कि जीवन में प्रेम से रहिए, पर चक्र लिए रहिए। इसका आशय यह नहीं कि आप हर समय संघर्ष के लिए तैयार रहें, बल्कि यह कि आपके व्यक्तित्व से यह स्पष्ट झलकना चाहिए कि आप प्रेमी, सजग, दयालु और दृढ़ भी हैं। आपके आसपास रहने वाले हर व्यक्ति को यह अहसास भी होना चाहिए कि गलत किया तो यह व्यक्ति छोड़ने वाला नहीं है। यह चेतावनी नहीं, मनुष्य के व्यक्तित्व की गरिमा है, जिसे देखकर लोग मर्यादा में रहते हैं।
जीवन में अत्यधिक कोमलता उतनी ही खतरनाक है जितनी अनावश्यक कठोरता। यदि आप कोमल हैं तो लोग आपका उपयोग करेंगे, और यदि अत्यधिक कठोर हैं तो लोग आपसे दूर हो जाएंगे। श्री कृष्ण का पथ दोनों का संतुलन साधने की कला है। शेर की तरह जीने का तात्पर्य यह नहीं कि आप दहाड़ें, दूसरों को डराएं या शक्ति का प्रदर्शन करें। इसका अर्थ है आपके भीतर ऐसी स्थिरता हो कि लोग आपकी शांति की कद्र और आपकी दृढ़ता का सम्मान करें। आपके व्यक्तित्व में वह स्पष्टता हो कि कोई आपको हल्के में लेने की भूल न करे। शेर के जीवन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह उपस्थिति से ही प्रभाव डालता है, और उसे अलग से कुछ सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती है।
पत्रकार डॉ. नीरज गजेंद्र किस महान हस्ती को बता रहे हैं ज्ञान की परंपरा और जीवन का सार





















