₹20.78 लाख पर सन्नाटा क्यों? खुर्सीपार जल योजना में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

“ये पानी की टंकी नहीं… ये महासमुंद में बना मौत का गड्ढा है!”

दिलीप शर्मा, महासमुंद। खुर्सीपार की अधूरी जल योजना पर ₹20.78 लाख खर्च का खुलासा होने के बाद भी प्रशासनिक चुप्पी बरकरार है। गांव में आज भी पानी टंकी अधूरी है, गड्ढा खुला पड़ा है, और 180 परिवारों को नियमित जलापूर्ति नहीं मिल रही — लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक न तो भुगतान का ब्योरा सार्वजनिक किया गया, न ही जांच की घोषणा हुई।

शिकायत के बाद क्या हुआ?

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए, लेकिन:

  • भुगतान की तारीखवार सूची जारी नहीं हुई

  • माप पुस्तिका (MB) सार्वजनिक नहीं की गई

  • ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई

  • साइट सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गई

क्या विभाग इंतजार कर रहा है कि कोई हादसा हो?


पूर्व सरपंच का आरोप

ग्राम पंचायत खुर्सीपार के पूर्व सरपंच दिलीप चक्रधारी का कहना है:

“निर्माण शुरू से ही लापरवाही में हुआ। प्लेटफार्म बने लेकिन पानी पहुंचने से पहले टूट गए। 6–7 लाख से ज्यादा काम जमीन पर नहीं दिखता। कई मजदूरों और स्थानीय लोगों का लाखों रुपए बकाया है।”

यदि यह आरोप सही है, तो सवाल और गंभीर हो जाता है — ₹20.78 लाख का वास्तविक उपयोग क्या हुआ?


रिकॉर्ड बनाम जमीनी सच्चाई

रिकॉर्ड मेंजमीन पर
₹20.78 लाख खर्चटंकी अधूरी
योजना “Ongoing”काम 4 महीने से बंद
नल कनेक्शन180 घरों में नियमित पानी नहीं

यह अंतर सिर्फ तकनीकी देरी है या वित्तीय गड़बड़ी?


मजदूरों की पीड़ा

ग्रामीणों के अनुसार:

  • चौकीदार की मजदूरी लंबित

  • स्थानीय मजदूरों का भुगतान अधूरा

  • ट्रैक्टर मालिकों का किराया बाकी

  • किराना दुकानदार का उधार शेष

यदि भुगतान हो चुका है, तो लाभार्थी कौन?


बड़ा सवाल अब प्रशासन से

  1. भुगतान किस आधार पर पास हुआ?

  2. क्या साइट निरीक्षण के बाद ही राशि जारी हुई?

  3. क्या ठेकेदार को नोटिस दिया गया?

  4. क्या तकनीकी ऑडिट होगी?


सुरक्षा खतरा बना गड्ढा

टंकी निर्माण के लिए खोदा गया गहरा गड्ढा, जिसमें लोहे की सरिए बाहर निकले हैं, ग्रामीणों के लिए संभावित खतरा बना हुआ है।
अगर दुर्घटना होती है, तो जिम्मेदार कौन होगा?


अब आगे क्या?

ग्रामीणों की मांग है:

  • स्वतंत्र तकनीकी जांच

  • भुगतान की वित्तीय ऑडिट

  • दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई

  • अधूरे काम को समयसीमा में पूरा किया जाए


2022 में शुरू हुई योजना 2026 में भी अधूरी है।
₹20.78 लाख खर्च के बावजूद पानी नहीं, जवाब नहीं।

खुर्सीपार अब सिर्फ पानी नहीं, पारदर्शिता चाहता है।

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