विश्व क्षय दिवस विशेष: देश में हर पांच मिनट में तीन की मौत हो जाती है टीबी से

रायपुर। 24 मार्च को विश्व क्षय दिवस है। याद है हमें बीते साल इस तारीख को छत्तीसगढ़ में सिर्फ एक कोरोेना के मरीज मिले थे। अब लाखों की संख्या को पार कर चुका है। इस वायरस से निजात पाने सरकारें काम कर रही है। वहीं, ट्यूबरकुलोसिस से तुलना की जाए तो वर्तमान सत्र के राज्य स्तरीय आंकड़ों में तकरीबन पैंतीस हजार टीबी के मरीजों को उपचारित करने का लक्ष्य रखा गया है। जिले की बात करें तो अब तक यहां कोरोना पीड़ित एक भी प्रकरण नहीं मिला है लेकिन, क्षय रोग को लेकर राज्य शासन से मिले निर्देशानुसार उपचार के लिए नब्बे फीसदी लक्षित आंकड़े को पार कर तकरीबन बयान्नवें फीसदी मलतब करीब 1482 मरीजों की चिकित्सकीय सेवाएं जारी हैं। उक्त तुलनात्मक विश्लेषण का उद्देश्य यह है कि सरकार की मंशा के अनुरूप वर्ष 2024 तक समूचे भारवर्ष को क्षय रोग मुक्त करने का सपना साकार हो।

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साथ ही हर साल की तरह इस बार भी मंगलवार 24 मार्च 2020 को विश्व क्षय रोग दिवस पर क्षय रोग यानी कि ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय ही नहीं अपितु, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर सहित जिले में भी लोगों में क्षय रोग जैसी संक्रामणकारी बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए। इस कड़ी में जिला क्षय नियंत्रण अधिकारी डॉ एनके मंडपे से मिली जानकारी के मुताबिक आट्ठारवीं सदी में सन 1882 को 24 मार्च के दिन राबर्ट कोच नामक विदेशी वैज्ञानिक ने क्षय रोग के जीवाणू की खोज की थी।

यह एक संक्रामक बीमारी

इस परिप्रेक्ष्य में जिले में भी विश्व क्षय दिवस मनाया जा रहा है। उनके मुताबिक क्योंकि यह एक संक्रामक बीमारी है और माइक्रोबैक्टीरियम ट्यबरकुलोसिस नाम के जीवाणू के कारण देश में प्रति संक्रमित व्यक्ति खांसने या छींकने पर दस से पंद्रह व्यक्तियों तक फैल कर प्रति पांच मिनट में तीन पीड़ितों को काल की गर्त में समा देती है।

इसलिए इस ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बढ़ते क्रम में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के जिला कार्यक्रम समन्वयक उत्तम श्रीवास ने बताया कि कलेक्टर सुनील कुमार जैन के निर्देशानुसार प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आरके परदल एवं जिला टी बी अधिकारी डॉ एन के मंडपे की देख-रेख में जिला चिकित्सालय परिसर में जिला क्षय केंद्र संचालित है। जहां, निशुल्क क्षय सेवाओं में सीबी-नॉट मशीन सहित अन्य अत्याधुनिक उपकरणों से संबंधित संभावित व पीड़ित मरीजों की जांच कर उपचार भी निशुल्क प्रदाय किया जा रहा है। साथ ही जिले में कुल पांच ट्रीटमेंट यूनिट एवं इक्कीस माइक्रोस्कोपिक केंद्र स्थापित हैं।

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यहां भी पूर्ण स्वास्थ्य जांच व्यवस्था है जिसमें क्षय रोग से पीड़ित की उम्र वजन व संक्रमण के अनुपात के आधार पर डाइट चार्ट तैयार कर पोषण आहार भी नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है। उल्लेखनीय है कि विगत कुछ वर्षों में जिलावासियों में क्षय रोग के प्रति जागरूकता में बढ़ोत्तरी देखी गई है। बावजूद इसके शत-प्रतिशत परिणाम एवं वर्ष 2024 तक क्षय मुक्ति के लक्ष्य को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपील की है कि ऐसे व्यक्ति जिन्हें दो हफ्तो से अधिक खांसी,

निशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ

शाम के समय बुखार, भूख न लगना, वनज कम होना, सांस फूलने की समस्या, रात के समय पसीना आना, छाती में दर्द एवं बलगम में खून आना जैसी दिक्कतें आती हैं। उन्हें उपचार के लिए अन्यत्र भटकने की जगह समय रहते राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम अतर्गत् प्रदत्त निशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेना चाहिए। यहां, शर्मिंदगी,

घबराने या छिपाने जैसी बात नहीं है क्यों कि औसतन नौं माह से अधिकतम दो वर्ष तक नियमित दवा का पूर्ण सेवन से क्षय रोग की बीमारी को जड़ से उखाड़ कर फेंका जा सकता है। ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई देने पर अवकाश के दिन छोड़ कर जिला क्षय केंद्र में पदस्थ स्वास्थ्यकर्मियों में पीएमडीटी समन्वयक घनश्याम प्रसाद देशमुख, डीपीपीएम समन्वयक ओंकार प्रासद पाठक, सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर विनय नाग, सीनियर टीबी लैब तकनीशियन उमेश कुमार ठाकुर, लेखापाल  कमलेश कुमार सिंह या डाटा डीईओ शिवराज शर्मा से संपर्क कर सकते हैं या स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नंबर 104 से भी जानकारी ले सकते हैं।

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