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नहीं देखा होगा किसान का ऐसा जुगाड़, बिना खर्च खेतों की बियासी

नांगर और ट्रैक्टर से बियासी कराने पर प्रति एकड़ 4 हजार रुपए का खर्च आता है जबकि चरवाहा बिना पैसे लिए ही बियासी मवेशियों से कराता है।

रायपुर। खेती में जुगाड़ तो बहुत कुछ देखने को मिलता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के एक किसान ने ऐसा जुगाड़ अपनाया है, जो चर्चा का विषय बना है। पलारी के गिर्रा गांव में किसान ने यहां के चरवाहा (बरदिहा) को बोलकर इनसे खेतो में मवेशी चरवाने का अनुरोध किया। किसान के इस अनुरोध से चरवाहा कुछ देर के लिए चकित तो जरूर हुआ लेकिन वह  खेतो में मवेशी चराने को राजी हो गया।

बतादें  मवेशी खेतों को अच्छे तरीके से रौंदते हैं ताकि धान के पौधे जमीन के अंदर चले जाएं और जमीन में अपनी जगह बना सकें। गांवों में छोटे किसान जो साधन संपन्न नहीं होते, बियासी के लिए यही तरीका अपनाते हैं।

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चरवाहे एक साथ 50 से 100 मवेशी लेकर खेत में ले जाते हैं जो आधे घंटे में एक एकड़ जमीन की बियासी करा देते हैं। नांगर और ट्रैक्टर से बियासी कराने पर प्रति एकड़ 4 हजार रुपए का खर्च आता है जबकि चरवाहा बिना पैसे लिए ही बियासी मवेशियों से कराता है।

किसानों का कहना है कि इस देशी तरीका से पहले भी बियासी कर चुके हैं, धान को मवेशी के रौदने से जरा भी खराब नहीं होता है। ये बात अगल है कि न के उपरी हिस्से को मवेशी चरते जरूर हैं लेकिन कुछ ही दिन में धान के पौधे पर पुन: नये तत्ती आना शुरू हो जाता है। इससे किसानों को बियासी खर्च का पूरा रुपए बच जाता है।

 

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