वाह छत्तीसगढ़: यहां आम लोगों पर कोरोना का खतरा…खास लोगों को देख डर रहा कोरोना, शादी और मरनी पर कड़ाई नेताओं के स्वागत को खुली छूट! पत्रकारों ने कहा- नेताओं के संरक्षण में गुंडाराज पनपते जा रहा है?

दिलीप शर्मा। वाह! छत्तीसगढ़ यहां आम लोगों और खास लोगों के लिए अलग-अलग नियम-कायदें हैं। यहां रात 8 बजे के बाद नाइट कर्फ्यू लग रही है। यदि कोई सड़क पर आम आदमी दिख जाए तो उसकी शामत आ जाएगी। शादी मरनी तथा धार्मिक स्थानों के लिए नियम कायदें बनाए गए हैं। लेकिन, जो कुछ सोमवार की रात छत्तीसगढ़ के महासमुंद में हुआ वह चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसमें कांग्रेस नेताओं के स्वागत में सब नियम कायदें तोड़ दिए गए। यहां प्रशासन मूखदर्शक बनकर देखते रही!

इनके स्वागत पर उठा सवाल

दरअसल, सोमवार की शाम एआईसीसी के छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सहमति से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम के निर्देश पर कांग्रेस संचार विभाग के सदस्य आरपी सिंह को युवा कांग्रेस और एनएसयूआई का मीडिया और सोशल मीडिया का प्रभारी बनाया गया हैं। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के सदस्य सुशील आनंद शुक्ला को मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया गया है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग में 5 विधायको को  प्रवक्ता नियुक्त किया गया.

  1. देवेंद्र यादव – विधायक भिलाई
  2. कुँवर सिंह निषाद – विधायक गुंडरदेही
  3. शकुंतला साहू – विधायक कसडोल
  4. विनोद चन्द्राकर – विधायक महासमुंद
  5. राम कुमार यादव – चंद्रपुर

वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक सवाल पूछते हुए कहा…

जिले में रात 8 बजे से लाकडाउन है, तो कहां थी पुलिस जब तुमगांव चौक में भीड़ जमी। कहाँ था जिला प्रशासन। लाकडाउन किसके लिए है, किसके लिए नहीं, प्रशासन बताए। नाइट कर्फ्यू का पालन नही हुआ तो नैतिकता के नाते कौन जिम्मेदार है। उन्होंने लिखा…जवाब चाहिए। घूम घूमकर दुकान बंद कराने वाले बिना मास्क फाइन करने वाले निर्बलों को सताने वाले, जवाब दें शादी और मरनी के लिए अनुमति जरूरी स्वागत के लिए कहाँ और किसने ली अनुमति दिखाएं। आदरणीय एसडीएम बताएं, राजनीतिक आयोजन की अनुमति ली गई थी क्या? या फिर इन्हें अनुमति न लेने की छूट है या फिर कल आपने क्या डयूटी निभाई। क्या प्रकरण दर्ज किया। निषेधाज्ञा के उल्लंघन के कितने मामले कल रात बनाए, जवाब अपेक्षित है। हालांकि इस पर सोशल मीडिया पर कोई भी प्रशासनिक अफसरों ने जवाब नहीं दिया।

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पत्रकार ने कहा- नेताओं के संरक्षण में गुंडाराज पनपते जा रहा है?

वहीं इलेक्ट्रानिक चैनल के वरिष्ठ पत्रकार मनोहर ठाकुर ने कहा- कल रात 8 बजे बाजे गाजे के साथ रैली निकाली गई, जब कि राजनीतिक सभा और रैलियां प्रतिबंधित है, इसी रैली में दो गुटों की आपसी भिड़ंत हुई, लेकिन पुलिस और प्रशासन मौन है? क्योंकि वो रैली आका की थी? आका का जश्न था? अरे भई जनता के टैक्स से अधिकारी और कर्मचारियों को तन्खा मिलता है? जनता के प्रति अपना जवाबदेही समझिए, वरना एक प्रेस विज्ञप्ति ये भी जारी करवा दीजिए कि हम इन नेता रूपी आकाओं के गुलाम है? जहां बैठने बोलेंगे वहां बैठे रहेंगे? जहां खड़ा होने बोलेंगे वहां खड़ा रहेंगे…आज महासमुंद क्या से क्या होते जा रहा है? नेताओं के संरक्षण में गुंडाराज पनपते जा रहा है?

नेता जी के साथ शराब माफिया? रेत माफिया?, गुटखा माफिया? जिनके नाम वारंट है, जिन्हें तड़ीपार करना चाहिए वो सीना तान के खड़े रहते है? और पुलिस और प्रशासन नेत्रहीन? मुखबधिर? बनी हुई है, आखिर क्यों? क्या इतना खौफ है इनका? या लिफाफे में वजन ज्यादा होता है??? सवाल पूछना तो बनता है जनता का?