Friday, January 22, 2021
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बीता हुआ कल : 2020 : कोरोना “राक्षस” रूपी के सामने नतमस्तक हुई “धर्म”

दिलीप शर्मा। साल 2020 कोरोना “राक्षस” ने ग्रहण लगा रखा था। इसके सामने पूरी धरती नतमस्तक हो गई। यहां तक धर्म के बीच भी राक्षस रूपी कोरोना का खौफ देखा गया। मंदिरों के पट बंद हो चुके, धर्म स्थल पर सन्नाटा छा गया, स्थिति ये रही कि भगवान के पास जाने से पहले मूंह और नाक बंद करना पड़ा यही नहीं भगवान के पैर छूने से पहले सेनेटाइजर अर्थात अल्कोहल युक्त पदार्थ से हाथ को धोना पड़ा। आइये जानते हैं धर्म के क्षेत्र में यह राक्षस रूपी कैसे भारी पड़ गया…
जनता कर्फ्यू के बाद 22 मार्च 2020 को लॉकडाउन प्रारंभ हुआ।

धर्म के साथ प्रारंभ हुई संक्रमण

जनता कर्फ्यू लॉकडाउन के बाद भी दिल्ली में तब्लिगी जमात ने पूरे देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर संक्रमण को फैलाया। इनका मुखिया मौलाना साद अब तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है।
धर्म के क्षेत्र में नास्त्रेदमस की भविष्वाणी की पुस्तक के छंद 2:53 में कोराना वायरस का जिक्र। श्रीराम शर्मा आचार्य की भविष्यवाणी का वीडियो भी खूब वायरल हुई। इसके अलावा बाइबल, कुरआन और पुरा‍ण आदि ग्रंथों की कुछ बातों को प्रचारित किया गया।
रामायण, महाभारत, कृष्णा जैसे पुराने धार्मिक टीवी सीरियल पुन: प्रारंभ हुए। दूरदर्शन के सबसे लोकप्रिय टीवी शोज में हैं। यही नहीं बड़े पर्दे की फिल्में भी तीसरे पर्दे पर रिलीज होने लगीं हैं।
22 मार्च 2020 को कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन के बाद नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार परंपरागत तरीके से नहीं मना पाए। लॉकडाउन में ऑनलाइन मंगनी और ऑनलाइन सगाई भी हो गई। करवां चौथा के त्योहार में भी पति ने पत्नी को वीडियो कॉलिंग कर आशीर्वाद मांगा।
कोरोना के चलते मंदिरों में भी बहुत कुछ बदलाव हुआ। घंटी बजना बंद, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ होने लगे दर्शन, चरणामृत और प्रसाद की व्यवस्था में भी बदलाव हुए। मंदिर के अंदर प्रसाद मिलना बंद हुआ। गर्भगृहों में लोगों के जाने पर रोक लगा दिया गया।

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लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं और अपराध के चलते सबसे पहले यह मुद्दा उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उठाया था और इस पर कानून बनाने की बात कही थी, लेकिन सबसे पहले मध्यप्रदेश की शिवराज सकार ने ही इस पर एक कानून बनाकर उसे कैबिनेट से पास करवा लिया।
ग्रहण : साल 2020 में 4 चंद्र ग्रहण और 2 सूर्य ग्रहण थे। इस साल चार उपच्छाया चंद्र ग्रहण रहे। पहला 10 जनवरी को, दूसरा 5 जून को, तीसरा 5 जुलाई को और चौथा 30 नवंबर को रहा। इसी तरह साल 2020 में दो सूर्य ग्रहण रहे पहला 21 जून को वलयकार सूर्य ग्रहण रहा, दूसरा 15 दिसंबर को पूर्ण सूर्य ग्रहण रहा।
योग, ध्यान और आयुर्वेद का बढ़ा प्रचलन इम्युनिटी बढाने से इस संक्रमण से बचा जा सकता है अत: लोग जहां योग और प्राणामाय ऑनलाइन सीखने लगे।
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