आप भी जानिए क्या था कृषि कानून और निरस्त करने का क्या है मतलब

तीन जून, 2020 कोर PM नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन कानूनों को मंजूरी दी, फिर इस पर अध्यादेशों लाया गया. दो दिन बाद, राष्ट्रपति ने अध्यादेशों को मंजूरी दी. संसद के मानसून सत्र के दौरान, सरकार ने इन तीनों कृषि कानूनों को पारित कर दिया.

नई दिल्‍ली। PM नरेंद्र मोदी ने तीन विवादास्‍पद कृषि कानूनों (Agriculture Law) को रद्द करने की घोषणा कर दी है. इन कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब (Punjab) और हरियाणा (Haryana) के किसान बीते एक साल से अधिक समय तक दिल्‍ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. आइए जानते हैं कि सरकार ने इन कानूनों को क्‍यों और कैसे आगे बढ़ाया. सरकार के इस कदम से किसान (Farmers) भले ही खुश हैं लेकिन PM नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा है कि कुछ किसान (Farmers) उनकी सरकार की ओर से लाए गए इन कानूनों की ताकत नहीं समझ सके.

आइए समझतें हैं मोदी सरकार ने किन तीन कृषि कानून को वापस लिया…

पहला कृषि कानून- कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020. इस कानून के आने के बाद किसान (Farmers) अपनी फसल को मनचाही जगह पर बेच सकते थे. किसानों (Farmers) को दूसरे राज्‍यों में भी अपनी फसल बेचने की छूट थी. कोई भी लाइसेंसधारक व्यापारी किसानों से परस्पर सहमत कीमतों पर उपज खरीद सकता था.

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दूसरा कृषि कानून – किसान (Farmers)  (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम 2020 था. यह कानून किसानों (Farmers) को अनुबंध खेती करने और अपनी उपज का स्वतंत्र रूप से विपणन करने की अनुमति देने के लिए था. इसके तहत फसल खराब होने पर नुकसान की भरपाई किसानों को नहीं बल्कि एग्रीमेंट करने वाले पक्ष या कंपनियों द्वारा की जाती.

तीसरा कानून- आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम. इस कानून के तहत असाधारण स्थितियों को छोड़कर व्यापार के लिए खाद्यान्न, दाल, खाद्य तेल और प्याज जैसी वस्तुओं से स्टॉक लिमिट हटा दी गई थी.

बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई के दौरान अर्थव्यवस्था को ताकत देने के लिए आत्मानिर्भर भारत अभियान के तहत इन कानूनों की घोषणा की थी. 3 जून, 2020 कोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन कानूनों को मंजूरी दी, फिर इस पर अध्यादेशों लाया गया. दो दिन बाद, राष्ट्रपति ने अध्यादेशों को मंजूरी दी. संसद के मानसून सत्र के दौरान, सरकार ने इन तीनों कृषि कानूनों को पारित कर दिया.

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेना पीएम मोदी को किस तरह प्रभावित करता है?

यह एनडीए सरकार द्वारा दूसरा रोलबैक है. पहला 2015 में भूमि अधिग्रहण सुधारों का था. दोनों ही मामलों में सरकार को किसानों के गुस्‍से का सामना करना पड़ा था. जिस तरह से सरकार ने इन कानूनों को वापस लिया है उसके बाद विपक्ष इन आरोपों को हवा देगा कि भाजपा के कदम ग्रामीण कृषक समुदायों की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं. प्रधानमंत्री मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने जिस तरह से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है

उससे लगता है कि यह एक सामरिक वापसी थी. उनका सुझाव था कि तीन कानून किसानों के हित में थे और उन्हें निरस्त करने का उनका निर्णय राष्ट्रीय हित में था. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किसानों के हित में एक निर्णय राष्ट्रीय हित में कैसे निरस्त किया जा रहा है. पीएम (Prime Minister Narendra Modi) स्पष्ट रूप से अपने राजनीतिक रुख को संतुलित करने का प्रयास रहे थे जो एक मजबूत और निर्णायक नेतृत्व की छवि को कमजोर कर रहा है. विपक्ष ने इस कदम की सराहना की है, लेकिन उन लोगों को इस फैसले से दुख हुआ है जो पिछले एक साल से सरकार के इन कानूनों का समर्थन कर रहे थे.

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