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108 एंबुलेंस खराब, एक घंटे तक तड़पती रही ढाई साल की बच्ची; 30 किमी बाइक से अस्पताल पहुंचाने में लगे दो घंटे

बागबाहरा/कोमाखान। स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवा की बदहाल व्यवस्था का खामियाजा सोमवार को एक परिवार को भुगतना पड़ा। तेज बुखार से गंभीर रूप से परेशान ढाई साल की बच्ची को अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों ने 108 एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन गांव पहुंची एंबुलेंस ही स्टार्ट नहीं हुई। करीब एक घंटे तक वाहन को चालू करने की कोशिश होती रही। बच्ची की हालत बिगड़ती देख परिजनों ने आखिरकार उसे बाइक से करीब 30 किलोमीटर दूर बागबाहरा के निजी अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल तक पहुंचने में करीब दो घंटे का समय लग गया।

जानकारी के अनुसार कोमाखान तहसील के नर्रा क्षेत्र के ग्राम पंडरीपानी निवासी गुमान की ढाई वर्षीय बेटी प्रियंशी पांडे पिछले करीब एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित थी। पिता के मुताबिक बच्ची का सरकारी अस्पताल में उपचार कराया जा रहा था, लेकिन बुखार उतरने का नाम नहीं ले रहा था। सोमवार को बच्ची की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई और उसे तेज बुखार के साथ काफी तकलीफ होने लगी।

108 को फोन किया, लेकिन एंबुलेंस ही हो गई खराब

बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस को फोन कर मदद मांगी। कुछ देर बाद 108 एंबुलेंस क्रमांक CG 04 X 1685 गांव पहुंची। परिजनों ने बच्ची को एंबुलेंस में बैठाया, लेकिन जैसे ही चालक ने वाहन स्टार्ट करने का प्रयास किया, वह चालू ही नहीं हुई।

परिजनों के अनुसार एंबुलेंस को चालू करने के लिए करीब एक घंटे तक प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस दौरान बच्ची की हालत को लेकर परिजनों की चिंता बढ़ती गई। चालक ने वाहन के इंजन में खराबी आने की बात बताई।

मजबूरी में बाइक से निकले, दो घंटे में पहुंचे अस्पताल

बच्ची की हालत गंभीर होने और एंबुलेंस के चालू नहीं होने के कारण परिजनों ने समय गंवाना उचित नहीं समझा। आखिरकार बच्ची को बाइक से करीब 30 किलोमीटर दूर बागबाहरा ले जाने का फैसला किया गया।

परिजनों के मुताबिक गांव से बागबाहरा के निजी अस्पताल तक पहुंचने में करीब दो घंटे का समय लग गया। वहां पहुंचने के बाद बच्ची को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

पिता बोले- एक सप्ताह से चल रहा था इलाज

बच्ची के पिता गुमान ने बताया कि प्रियंशी को करीब एक सप्ताह से बुखार था। उसका सरकारी अस्पताल में उपचार कराया जा रहा था, लेकिन बुखार लगातार बना हुआ था। सोमवार को उसकी तकलीफ ज्यादा बढ़ गई, जिसके बाद 108 को फोन कर एंबुलेंस बुलाई गई। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस पहुंची, लेकिन खराब होने के कारण बच्ची को अस्पताल ले जाने में मदद नहीं मिल सकी।

एंबुलेंस की व्यवस्था पर उठे सवाल

108 एंबुलेंस ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण आपातकालीन सेवा है। ऐसे में मरीज को लेने पहुंची एंबुलेंस का मौके पर ही खराब हो जाना स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था और वाहनों के नियमित मेंटेनेंस पर सवाल खड़े करता है।

खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां अस्पताल कई किलोमीटर दूर होते हैं, वहां आपात स्थिति में एंबुलेंस ही मरीज और अस्पताल के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। ऐसे में यदि एंबुलेंस समय पर स्टार्ट न हो पाए तो मरीज की परेशानी और बढ़ सकती है।

सवाल यह है कि 108 जैसी आपातकालीन सेवा के वाहनों की नियमित जांच और मेंटेनेंस आखिर कितनी गंभीरता से किया जा रहा है? यदि किसी गंभीर मरीज को लेने पहुंची एंबुलेंस ही खराब हो जाए, तो ऐसी स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई—यह जांच का विषय है।

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