पटवारी पदोन्नति: हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को दिया 2 महीने का अल्टीमेटम!

ब्रेकिंग न्यूज़: बिलासपुर हाई कोर्ट ने पटवारी से RI पदोन्नति की याचिका पर राज्य शासन को निर्देश दिए

बिलासपुर। 23 मार्च 2026 – बिलासपुर हाई कोर्ट ने पटवारी से राजस्व निरीक्षक (RI) के पद पर पदोन्नति की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य शासन को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य सरकार 60 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर विधिपरक निर्णय ले। साथ ही, याचिकाकर्ताओं को सक्षम अधिकारियों के समक्ष 15 दिनों के भीतर अपना अभ्यावेदन पेश करने का निर्देश भी दिया गया है।

पदोन्नति की मांग पर हाई कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि लंबे समय से सेवाएं देने वाले पटवारियों की वरिष्ठता और प्रमोशन की मांगों की अनदेखी नहीं की जा सकती। याचिकाकर्ता, जो कि बीस से पच्चीस वर्षों से पटवारी के रूप में कार्यरत हैं, ने अपने अधिवक्ता अनुकूल विश्वास के माध्यम से यह याचिका दायर की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि ऐसे अधिकांश पटवारी पहले ही राजस्व निरीक्षक प्रशिक्षण सूची में शामिल किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पदोन्नति से वंचित रखा गया है।

पदोन्नति के नियम और मापदंड

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार द्वारा पदोन्नति के लिए निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में 50 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरने का नियम है, जिसमें राज्य शासन के निर्देशों का उल्लंघन स्पष्ट है। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए कनिष्ठ पटवारियों को पदोन्नति दी गई है, जो नियमों का उल्लंघन है।

हाई कोर्ट का अंतिम निर्देश

सुनवाई के अंत में, हाई कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं का अभ्यावेदन 15 दिनों के भीतर लिया जाए और इसके संबंध में 60 दिनों के भीतर निर्णय किया जाए। कोर्ट ने कहा कि इस मामले के मेरिट के आधार पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की गई है और सक्षम प्राधिकारी स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम होगा।

निष्कर्ष

बिलासपुर हाई कोर्ट का यह निर्णय पटवारियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि लंबे समय से प्रमोशन की बहाली की मांग की जा रही थी। अब देखना होगा कि राज्य शासन इस आदेश का पालन किस प्रकार करता है और याचिकाकर्ताओं के मामले में क्या निर्णय लिया जाता है। यह निर्णय शासन के नियमों और कर्मचारियों के अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।

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