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बाथरूम में छिपे थे 40 हजार रुपये! जानें कैसे एक गार्ड की ईमानदारी ने खोला राम मंदिर दान चोरी का ‘महाघोटाला’

अयोध्या: भव्य राम मंदिर में रामलला के चरणों में अर्पित होने वाले चढ़ावे की चोरी का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। इस पूरे घोटाले की जांच में यूपी पुलिस का एक्शन अब और तेज हो गया है। गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों के ठिकानों पर पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। बहराइच से लेकर प्रतापगढ़ तक आरोपियों के रिश्तेदारों और करीबियों से पूछताछ की जा रही है।

लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आस्था के केंद्र में चल रहे इस इतने बड़े घोटाले की पोल कैसे खुली? हैरानी की बात यह है कि इसकी शुरुआत किसी लिखित शिकायत से नहीं, बल्कि एक सुरक्षा गार्ड की ईमानदारी से हुई थी।

बाथरूम में छिपाए गए थे 40 हजार रुपये

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला मई के आखिरी सप्ताह में तब शुरू हुआ जब राम मंदिर परिसर के ही एक बाथरूम में छुपाकर रखे गए 40,000 रुपये की नकदी मिली। मुख्य गेट पर तैनात एक मुस्तैद सुरक्षा गार्ड की नजर इस लावारिस पैसे पर पड़ी। गार्ड ने बिना किसी लालच के, तुरंत इसकी सूचना ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के एक ट्रस्टी को दे दी।

इस सूचना के मिलते ही राम मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी और सुरक्षा अधिकारी तुरंत हरकत में आ गए। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई गई कि दान पेटियों से आने वाली नकदी में कोई बड़ी हेराफेरी चल रही है। ट्रस्ट ने तुरंत अपनी आंतरिक जांच शुरू की और 4 जून को जिला प्रशासन को भी इस संदिग्ध गतिविधि से अवगत कराया।

चंपत राय ने बनाई 21 सदस्यों की टीम

जैसे ही यह मामला ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के संज्ञान में आया, उन्होंने तुरंत 21 सदस्यों की एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी। इस टीम ने:

  • दान राशि की गिनती करने वाले केंद्र (काउंटिंग सेंटर) की पूरी व्यवस्था को परखा।
  • वहां तैनात कर्मचारियों से कड़ाई से पूछताछ की।
  • गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद औपचारिक आपराधिक जांच शुरू हुई।

17 घंटे की ताबड़तोड़ छापेमारी और 80 लाख रुपये बरामद

राम मंदिर ट्रस्ट की शिकायत मिलते ही यूपी पुलिस एक्शन मोड में आ गई। पुलिस ने दान गिनने वाले कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

पूछताछ से मिले सुरागों के आधार पर अयोध्या, बहराइच और प्रतापगढ़ सहित कई जिलों में एक साथ दबिश दी गई। एफआईआर दर्ज होने के महज 17 घंटे के भीतर पुलिस और ट्रस्ट की संयुक्त टीम ने अलग-अलग ठिकानों से करीब 80 लाख रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद कर ली।

  • बहराइच (नानपारा): आरोपी रमाशंकर मिश्रा के घर पर छापेमारी की गई।
  • प्रतापगढ़ (कुंडा): आरोपी अविनाश शुक्ला के पैतृक आवास पर तलाशी ली गई।
  • अन्य बरामदगी: आरोपी अनुकल्प मिश्रा, उसके रिश्तेदार लवकुश मिश्रा और अयोध्या निवासी करुणेश की निशानदेही पर भारी मात्रा में नकदी के साथ कुछ आभूषण भी बरामद किए गए हैं।

एसआईटी (SIT) खंगाल रही है पूरा नेटवर्क

अब इस संवेदनशील और बड़े मामले की कमान विशेष जांच दल (SIT) के हाथों में है। एसआईटी की टीमें अब इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी हैं। जांच एजेंसी मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर काम कर रही है:

  1. राम मंदिर दान की रकम का गबन किस तरह (मोडस ऑपेरंडी) किया जाता था?
  2. इस गिरोह में राम मंदिर प्रशासन या बैंक के और कितने लोग शामिल हैं?
  3. यह पूरा खेल कितने समय से चल रहा था और अब तक कुल कितने करोड़ की चोरी हो चुकी है?
  4. चोरी किए गए इस पैसे को कहां-कहां निवेश किया गया है (क्योंकि इस मामले का लिंक शेयर मार्केट से भी जुड़ रहा है)।

नतीजा: जिस राम मंदिर दान चोरी को आरोपी बेहद शातिर तरीके से अंजाम दे रहे थे, उसे एक मामूली सुरक्षा गार्ड की ईमानदारी और मुस्तैदी ने बेनकाब कर दिया। आज यूपी पुलिस की टीमें आरोपियों के पूरे साम्राज्य को खंगाल रही हैं।

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