बिलासपुर/महासमुंद। महासमुंद जिले के बागबाहरा थाना क्षेत्र में दर्ज दुष्कर्म के मामले में आरोपी नरेंद्र नयन शास्त्री को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने 7 अगस्त 2026 को पारित आदेश में एफआईआर दर्ज होने में करीब तीन साल की देरी, चार्जशीट दाखिल हो जाने और आरोपी के न्यायिक अभिरक्षा में रहने जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियमित जमानत मंजूर की।
हालांकि, नरेंद्र नयन शास्त्री फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। वजह यह है कि उनके खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी (धारा 420) के एक अन्य मामले में अभी जमानत नहीं मिली है, इसलिए उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में ही रहना होगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रलय थीटे और शिवा आर्तत्राण पवार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित जमानत आदेश के अनुपालन में माननीय न्यायालय बागबाहरा के समक्ष जमानत प्रस्तुत की।

क्या है पूरा मामला?
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार मामला बागबाहरा थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 107/2026 से संबंधित है। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(i), 376(2)(n) और 376(2)(m) के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
अभियोजन के अनुसार, पीड़िता आंखों की बीमारी से परेशान थी। इलाज से राहत नहीं मिलने पर उसके पिता के परिचित के माध्यम से आरोपी से संपर्क हुआ। आरोप है कि आरोपी नरेंद्र नयन शास्त्री ने धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से इलाज का भरोसा दिलाया।
मई 2023 में पीड़िता अपने परिवार के साथ बागबाहरा स्थित श्री जिन कुशल सूरी जैन भवन पहुंची, जहां आरोपी भागवत कथा कर रहा था। अभियोजन के मुताबिक, इलाज के बहाने आरोपी ने पीड़िता को अपने कमरे में बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। अगले दिन भी इसी तरह की घटना होने का आरोप लगाया गया है।
शादी के बाद दर्ज हुई शिकायत
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, पीड़िता का विवाह 2 मार्च 2025 को हुआ। विवाह के बाद उसने अपने पति को कथित घटना की जानकारी दी। इसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई और 6 जून 2026 को बागबाहरा थाने में एफआईआर दर्ज हुई।
हाईकोर्ट ने किन आधारों पर दी जमानत?
बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि कथित घटना मई 2023 की है, जबकि एफआईआर लगभग तीन वर्ष बाद दर्ज की गई। साथ ही मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और आरोपी 14 जून 2026 से जेल में है।
राज्य सरकार ने जमानत का विरोध किया, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को नियमित जमानत देने का आदेश दिया।
जमानत के साथ लगाई गईं शर्तें
हाईकोर्ट ने आरोपी को निर्देश दिया है कि वह ट्रायल के दौरान गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा, अनावश्यक स्थगन नहीं मांगेगा और ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित सभी तारीखों पर उपस्थित रहेगा। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को भी निर्देश दिया है कि यदि कोई कानूनी बाधा न हो तो छह माह के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करने का प्रयास किया जाए।
420 के मामले में नहीं मिली राहत
हालांकि दुष्कर्म मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद धोखाधड़ी (धारा 420) के दूसरे प्रकरण में जमानत नहीं मिलने के कारण नरेंद्र नयन शास्त्री फिलहाल जेल में ही रहेंगे।

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