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तीन फीट नीचे मिला रहस्यमयी धातु खंड, सुअरमार गढ़ के इतिहास को लेकर बढ़ी जिज्ञासा

महासमुंद, 13 अगस्त 2026। ग्राम सुअरमार निवासी विजय कुम्हार के मकान निर्माण के लिए जमीन की खुदाई के दौरान मिले धातु खंड को उन्होंने गुरुवार को जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह को नियमानुसार सौंप दिया। यह धातु खंड गत 2 अगस्त को मकान निर्माण के दौरान करीब तीन फीट की गहराई में खुदाई करते समय मिला था।

मकान मालिक विजय कुम्हार निखात के रूप में प्राप्त धातु वस्तु को जमा कराने के लिए गुरुवार को जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान ग्राम सुअरमार के पूर्व सरपंच मूलचंद चंद्राकर तथा पूर्व माध्यमिक शाला कसेकेरा के प्रधान पाठक विजय शर्मा भी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन ने प्राप्त धातु वस्तु को सुरक्षित रूप से अपने कब्जे में ले लिया है।

प्राप्त धातु खंड का वजन करीब 1.70 ग्राम बताया गया है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 17 हजार रुपये बताई जा रही है। हालांकि धातु की वास्तविक संरचना और उसमें सोने की मात्रा की अभी वैज्ञानिक जांच नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल स्वर्ण धातु मानना उचित नहीं होगा।

तीन फीट की गहराई में मिला धातु खंड

जानकारी के अनुसार, विजय कुम्हार के मकान निर्माण के लिए जमीन की खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान करीब तीन फीट की गहराई में यह धातु खंड मिला। मौके से काली मिट्टी और पुरानी खपरैल (मिट्टी की टाइलों) के अवशेष भी मिलने की बात सामने आई है।

प्राप्त धातु वस्तु चपटी और अनियमित आकार की है। इसकी सतह पर दबाव तथा मोड़ के निशान दिखाई देते हैं। प्रारंभिक तौर पर यह किसी हथौड़े से पीटकर तैयार की गई धातु की पट्टिका अथवा पत्र जैसी प्रतीत होती है। हालांकि इसकी वास्तविक प्रकृति और धातु संरचना का निर्धारण विशेषज्ञों की जांच के बाद ही हो सकेगा।

सुअरमार गढ़ से मिला स्वर्ण रंग का धातु अवशेष


सुअरमार गढ़ के ऐतिहासिक महत्व पर फिर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ के पूर्वी हिस्से में स्थित सुअरमार गढ़ क्षेत्र को स्थानीय स्तर पर ऐतिहासिक महत्व वाला क्षेत्र माना जाता है। मकान निर्माण के दौरान जमीन के भीतर से धातु खंड के साथ पुरानी खपरैल और मिट्टी के अवशेष मिलने से क्षेत्र के पुरातात्त्विक महत्व को लेकर नई जिज्ञासा पैदा हुई है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैज्ञानिक अथवा पुरातात्त्विक जांच में प्राप्त धातु खंड की वास्तविक प्रकृति क्या सामने आती है और क्या इसका संबंध सुअरमार गढ़ के पुराने इतिहास से है। फिलहाल इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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