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महासमुंद से पलायन की दर्दनाक तस्वीर: एक साल से बेटा-बहू लापता, पिता ने लगाई गुहार

महासमुंद से हर साल हजारों मजदूर करते हैं पलायन, श्रमिकों की सुरक्षा और कथित बिचौलियों की भूमिका पर उठे सवाल

महासमुंद। रोजगार की तलाश में दूसरे प्रदेश गए मजदूरों की परेशानियां एक बार फिर सामने आई हैं। महासमुंद जिले के सरेकेल गांव निवासी भगवान सिंह ध्रुव का बेटा कुन्दन ध्रुव अपनी पत्नी के साथ पिछले साल रक्षाबंधन पर घर से निकला था, लेकिन अब तक वापस नहीं लौटा। परिजनों का आरोप है कि दोनों उत्तर प्रदेश के एक ईंट-भट्ठे में काम करने गए थे, जहां उन्हें कथित तौर पर जबरिया रोका गया है। बेटे-बहू से संपर्क नहीं होने पर पिता ने 13 अक्टूबर को कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत देकर उनकी सुरक्षित वापसी की मांग की है।

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एक साल से नहीं हो रहा संपर्क

भगवान सिंह ध्रुव के अनुसार, उनका बेटा कुन्दन पत्नी के साथ घर से निकला था। बाद में जानकारी मिली कि दोनों उत्तर प्रदेश के ईंट-भट्ठे में काम कर रहे हैं। पिता ने अपनी शिकायत में मिथिलेश बरिहा, सुलोचना बरिहा और थान बाई बरिहा के संबंध में आरोप लगाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि कुन्दन का मोबाइल फोन बंद है और परिवार को उसकी तथा बहू की वर्तमान स्थिति की जानकारी नहीं मिल पा रही है।

शिकायत में प्रशासन से दोनों को सुरक्षित वापस लाने और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

हर साल हजारों मजदूरों का पलायन

महासमुंद जिले से हर साल हजारों मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं। इसी के साथ मजदूरों को काम पर भेजने वाले बिचौलियों, मजदूरी और कार्यस्थल पर सुरक्षा से जुड़े सवाल भी सामने आते रहे हैं। हाल ही में जिले की पुलिस ने पलायन से जुड़े मामलों में कार्रवाई करते हुए कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

इसके बावजूद कथित तौर पर मजदूरों को बाहर भेजने वाले बड़े एजेंटों की भूमिका और पूरे नेटवर्क की जांच की जरूरत बनी हुई है। हालांकि, जिन लोगों के खिलाफ कोई आधिकारिक आरोप या साक्ष्य सामने नहीं आए हैं, उनकी संलिप्तता को जांच के बिना तथ्य नहीं माना जा सकता।

प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती

कुन्दन और उसकी पत्नी की स्थिति का पता लगाकर उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे अहम चुनौती है। साथ ही, जिले से बाहर जाने वाले मजदूरों के पंजीयन, ठेकेदारों की जानकारी और दूसरे राज्यों में उनकी सुरक्षा की निगरानी को प्रभावी बनाने की जरूरत है।

अब देखना होगा कि जनदर्शन में मिली शिकायत पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और एक साल से बेटे-बहू की राह देख रहे पिता को कब राहत मिलती है।

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