महासमुंद जिले में “सस्ते दाम में छड़-सिमेंट दिलाने” और “सामान का पैसा देने” का झांसा देकर चोरी करने वाला एक शातिर गिरोह सक्रिय होने की आशंका गहरा गई है। हाल ही में कोमाखान थाना क्षेत्र के चंदरपुर और उखरा गांव में सामने आए मामलों का तरीका ठीक वैसा ही है, जैसा बसना और सांकरा थाना क्षेत्र में हुई चोरी की घटनाओं में देखने को मिला था।
पुलिस FIR के अनुसार बसना-सांकरा क्षेत्र में चार अलग-अलग घरों में इसी पैटर्न पर चोरी हुई थी। अब कोमाखान क्षेत्र में भी उसी तरीके से वारदात होने के बाद लोगों में दहशत है।
ऐसे काम करता है ‘छड़-सिमेंट गैंग’
सभी मामलों में आरोपियों का तरीका लगभग एक जैसा मिला है। आरोपी गांवों में पहुंचकर:
- खुद को सप्लायर या परिचित बताते हैं
- कहते हैं कि “छड़-सिमेंट का पैसा देना है”
- परिवार के सदस्य का नाम लेकर भरोसा जीतते हैं
- मोबाइल पर बात कराने का नाटक करते हैं
- बच्चों और बुजुर्गों को बातचीत में उलझाते हैं
- मौका मिलते ही आलमारी, पेटी या बक्से से नकदी और जेवर पार कर देते हैं
बसना-सांकरा क्षेत्र में 4 घर बने थे निशाना
सांकरा थाना क्षेत्र में चार अलग-अलग मामलों में चोरी दर्ज हुई थी। आरोपियों ने घर में अकेले मौजूद बच्चों और बुजुर्गों को निशाना बनाया।
प्रमुख मामलों में:
- अंसुला गांव में नगदी और जेवर सहित लगभग 64 हजार रुपये की चोरी
- लोहरिनडोंगरी गांव में 40 हजार रुपये नकद पार
- झगरनडोंगरी में नगदी और आभूषण चोरी
- एक अन्य मामले में प्रधानमंत्री आवास के लिए रखी रकम और जेवर गायब
इन सभी घटनाओं में आरोपी “छड़-सिमेंट का पैसा” और “सामान पहुंचाने” जैसी बातें कर घर में घुसे थे।
कोमाखान में भी वही पैटर्न
चंदरपुर गांव
राजमिस्त्री चैनलाल साहू के घर आरोपी ने “3 क्विंटल छड़ का पैसा देने” की बात कहकर घर में प्रवेश किया। कुछ देर बाद आलमारी से 12 हजार नकद और करीब 80 हजार रुपये के जेवर गायब मिले।
उखरा गांव
भोजराम ठाकुर के घर आरोपी ने बच्ची से कहा कि “तुम्हारे पिता ने छड़-गिट्टी मंगवाया है।” मोबाइल पर बात कराने का नाटक करते हुए आरोपी ने आलमारी और बक्से से करीब 91 हजार रुपये के नगदी और जेवर पार कर दिए।
बच्चों और बुजुर्गों को बना रहे आसान टारगेट
सभी घटनाओं में एक बात समान है — आरोपी उन घरों को चुन रहे हैं जहां:
- परिवार का मुख्य सदस्य बाहर हो
- घर में केवल बच्चे या बुजुर्ग मौजूद हों
- लोग मजदूरी या निर्माण कार्य से जुड़े हों
इससे साफ है कि गिरोह पहले रेकी कर लोगों की स्थिति समझ रहा है।
पुलिस को संगठित गिरोह होने का शक
लगातार अलग-अलग थाना क्षेत्रों में एक जैसे मामलों के सामने आने के बाद पुलिस को किसी संगठित गिरोह के सक्रिय होने की आशंका है। अलग-अलग थानों में अपराध दर्ज कर जांच की जा रही है।
ग्रामीणों के लिए जरूरी सावधानी
⚠️ किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें
परिवार के सदस्य का नाम लेने पर भी तुरंत पुष्टि करें।
⚠️ बच्चों को जागरूक करें
किसी अजनबी को घर के अंदर न आने दें।
⚠️ नकदी और जेवर सुरक्षित रखें
अलमारी की चाबी खुले में न रखें।
⚠️ गांव में संदिग्ध दिखे तो सूचना दें
तुरंत पुलिस और ग्राम पंचायत को जानकारी दें।
⚠️ मोबाइल पर नकली बातचीत से सावधान रहें
फोन पर बात कराने का नाटक कर आरोपी भरोसा जीतते हैं।
जनजागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
ग्रामीण इलाकों में बदलते अपराध के तरीके अब चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। सतर्कता, जागरूकता और समय पर सूचना ही ऐसे गिरोहों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।



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