सत्य, समानता और मानवता के पुजारी बाबा

डॉ. नीरज गजेंद्र, वरिष्ठ पत्रकार

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Dr. Neeraj

आज का दिन बहुत खास है। आज 18 दिसंबर है। महान संत बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती का दिन। पूरा छत्तीसगढ़ आज उनके विचारों को नमन कर रहा है। लाखों अनुयायी श्रद्धा और उत्साह के साथ उन्हें याद कर रहे हैं। बाबा गुरु घासीदास छत्तीसगढ़ की आत्मा का प्रतीक हैं। उनका जीवन संघर्ष की मिसाल है। उन्होंने सत्य और समानता का संदेश दिया। उन्होंने कहा सत्य ही ईश्वर है। बाबा ने लोगों को सतनाम पंथ का रास्ता दिखाया। सतनाम का मतलब सत्य का नाम है। उन्होंने कहा ईश्वर बाहरी दिखावे में नहीं मिलता। ईश्वर सच्चे मन और अच्छे कर्मों में बसता है। बाबा कहते थे सच बोलो। सादगी से रहो। किसी के साथ भेदभाव मत करो। उनका जीवन समाज में समानता लाने के लिए समर्पित था। उन्होंने बताया कि कोई भी इंसान छोटा या बड़ा नहीं होता है। सब एक समान हैं। सबको सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने अंधविश्वास और कुप्रथाओं का विरोध किया। उन्होंने हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई।

उनके विचार लोगों के दिलों तक पहुंचे। सतनाम पंथ धीरे-धीरे एक आंदोलन बन गया। गिरौदपुरी में बाबा ने जैतखाम की स्थापना की। यह जैतखाम सत्य, न्याय और मानवता का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि सच से बड़ा कुछ नहीं है। आज भी लाखों लोग गिरौदपुरी में बाबा को नमन करते हैं। आज के समय में बाबा गुरु घासीदास के विचार और भी जरूरी हो गए हैं। समाज में आज भी भेदभाव है। जात-पात के नाम पर लोग बंट जाते हैं। बाबा का संदेश हमें जोड़ता है। उन्होंने सिखाया है कि सबको समान समझो। सच्चाई और करुणा से ही समाज आगे बढ़ेगा।

बाबा गुरु घासीदास का कहना था कि सत्य ही धर्म है। सत्य ही ईश्वर है। दिखावे से बचो। सच्चे इंसान बनो। सच्चाई से जीवन जियो। दूसरों के साथ समान व्यवहार करो। तभी समाज बेहतर बनेगा। आज की दुनिया में लोग भौतिकता में उलझते जा रहे हैं। लोग एक-दूसरे से दूर हो रहे हैं। लेकिन बाबा गुरु घासीदास का सत्य और समानता का संदेश हमें सही राह दिखाता है। अगर हम उनके विचारों को अपनाएं, तो समाज बदल सकता है। बाबा का जीवन हमें सिखाता है कि संघर्ष करो, लेकिन सत्य के साथ। उन्होंने गरीबों और कमजोरों को आत्मसम्मान से जीना सिखाया। उन्होंने बदलाव की एक नई रोशनी जलाई। उनकी शिक्षा हमें आज भी प्रेरित करती है।

बाबा गुरु घासीदास का जीवन हमें सिखाता है कि संघर्ष करके भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने गरीबों और कमजोरों को आत्मसम्मान से जीना सिखाया। उनकी शिक्षा हमें आज भी प्रेरणा देती है। हम सिर्फ उनकी जयंती नहीं मनाते। हम उनके विचारों को याद करते हैं। हमें उनके बताए रास्ते पर चलना चाहिए। सत्य, समानता और सादगी को अपनाना चाहिए। महान संत गुरु घासीदास का जन्म 18 दिसंबर, 1756 को गिरौदपुरी में हुआ। उनका जीवन बहुत साधारण परिवार में बीता। लेकिन उन्होंने समाज की बुराइयों को दूर करने के लिए बड़ा काम किया। उस समय जात-पात, ऊंच-नीच और अंधविश्वास की जड़ें बहुत गहरी थीं। गरीब और दलित लोग बहुत परेशान थे। बाबा ने इन समस्याओं को देखा और उनके खिलाफ खड़े हो गए।

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