बड़ी खबर: CBI कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला! 19 साल पुराने रिश्वत मामले में 77 साल के पूर्व आयकर अधिकारी को मिली सजा, जानें पूरे मामले की सच्चाई!

ब्रेकिंग न्यूज: ठाणे में CBI अदालत का बड़ा फैसला, 19 साल पुराना रिश्वत मामला

ठाणे/मुंबई: 31 मार्च 2026 – महाराष्ट्र की ठाणे स्थित विशेष CBI अदालत ने 19 साल पुराने एक रिश्वत मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने नवी मुंबई में तैनात रहे 77 वर्षीय पूर्व आयकर अधिकारी को 20,000 रुपये की रिश्वत लेने के लिए 6 महीने की कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में न्यायालय सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटता।

पूर्व आयकर अधिकारी पर लगा जुर्माना

विशेष न्यायाधीश डी.एस. देशमुख ने 27 मार्च को दिए अपने आदेश में पूर्व आयकर अधिकारी दीनानाथ कृष्ण पुथरन पर 4,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले की सुनवाई में सबूतों के अभाव के चलते एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और एक टैक्स असिस्टेंट को अदालत ने बरी कर दिया है। यह मामला 18 साल तक चला, जिसमें कई सुनवाई हुईं और सबसे महत्वपूर्ण सबूतों का अभाव सामने आया।

रिश्वत का पूरा मामला

यह मामला 2007 में शुरू हुआ जब पुथरन वाशी में आयकर अधिकारी के पद पर तैनात थे। लक्ष्मी इलेक्ट्रिकल एंड कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर समराज नाइकर ने CBI के एंटी-करप्शन ब्यूरो में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि पुथरन ने उनकी कंपनी और पत्नी की टैक्स फाइलों को क्लियर करने के लिए 40,000 रुपये की रिश्वत मांगी।

सीबीआई की जांच ने यह पुष्टि की कि प्रारंभ में 50,000 रुपये की मांग की गई थी, लेकिन बातचीत के बाद यह रकम 40,000 रुपये पर तय हुई।

रंगे हाथों गिरफ्तारी

सीबीआई ने 3 जनवरी 2007 को इस शिकायत के आधार पर एक ट्रैप बिछाया और पुथरन को 20,000 रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। मामले में शामिल दो अन्य व्यक्तियों, एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और एक टैक्स असिस्टेंट, को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

अदालत की सख्त टिप्पणी

जज ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष ने साबित किया है कि पुथरन ने एक सार्वजनिक सेवक की हैसियत से अपने पद का दुरुपयोग किया। शिकायतकर्ता से अवैध रिश्वत मांगने और उसे स्वीकार करने का काम गंभीर अपराध है, जिसके लिए अदालत ने सजा निर्धारित की है।

निष्कर्ष

यह फैसला दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून में सख्ती बरकरार है। सरकार और न्यायालय के प्रयास यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि किसी भी पब्लिक सर्वेंट के लिए अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना अनिवार्य है और इस प्रकार के अपराधों की किसी भी हालात में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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