ब्रेकिंग न्यूज़: छत्तीसगढ़ में रिटायर बिजली कर्मचारियों के ग्रेज्युटी में बड़ा घोटाला!
कोरबा: 10 अप्रैल, 2026। छत्तीसगढ़ के कोरबा में रिटायर बिजली कर्मचारियों की ग्रेज्युटी राशि में बड़े पैमाने पर गबन का मामला सामने आया है। यहां एक संविदा कर्मचारी पर आरोप है कि उसने रिटायर कर्मचारियों के खातों में जमा की जाने वाली ग्रेज्युटी राशि को अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर लिया। इस मामले से संबंधित सरकारी विभाग ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के रिटायर कर्मचारियों के ग्रेज्युटी फंड में धोखाधड़ी की घटना प्रकाश में आई है। जानकारी के अनुसार, तुलसी नगर सब स्टेशन के संविदा कर्मी हरीश कुमार ने कार्यपालन अभियंता से ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर कराए। इसके बाद उसने चेक में अपने बैंक खाते का नंबर भरकर लाखों रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए। इससे संबंधित रिटायर कर्मचारियों को यह धनराशि समय पर नहीं मिली, जिससे हड़कंप मच गया।
गड़बड़ी का खुलासा कैसे हुआ?
यह मामला तब सामने आया जब एक रिटायर कर्मचारी ने अपनी ग्रेज्युटी राशि प्राप्त न होने की शिकायत की। कार्यालय में जांच करने पर पता चला कि निर्धारित राशि संविदा कर्मचारी के खाते में चली गई थी। प्रारंभिक जांच में अब तक 6 रिटायर कर्मचारियों की ग्रेज्युटी राशि के गबन का खुलासा हो चुका है, जिसमें कुल 20 लाख 58,788 रुपये शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है एवं विभागीय जांच भी जारी है।
आरोपी का बचाव और आगे की कार्रवाई
संविदा कर्मी ने अपने बचाव में यह दावा किया है कि उसके इस काम के पीछे कार्यपालन अभियंता का आदेश था। उसने इस संबंध में रायपुर स्थित कंपनी के मुख्यालय को पत्र भी भेजा है। हालाँकि, विभागीय अधिकारियों ने मामले की गहनता से छानबीन करने का निर्णय लिया है। पुलिस द्वारा बैंक लेनदेन और दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि पूरे प्रकरण का सच सामने आ सके।
निष्कर्ष: आवश्यक कार्रवाई समय पर होनी चाहिए
इस घोटाले ने छत्तीसगढ़ के बिजली विभाग को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाते हुए सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएँ न हों। साथ ही, रिटायर कर्मचारियों की सुरक्षा और उनकी वित्तीय हक़ीकत का ध्यान भी रखना आवश्यक है। ऐसे मामलों में सख्ती से निपटना जरूरी है ताकि कर्मचारियों का विश्वास कायम रहे।
