ब्रेकिंग न्यूज़: छत्तीसगढ़ में रिश्वतखोरी का मामला, लेखापाल को मिली सजा
अंबिकापुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ में एक महत्वपूर्ण मामले में, तत्कालीन लेखापाल सहायक ग्रेड 2 को सेवानिवृत्त प्रधान पाठक से 10,000 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में तीन साल की सजा सुनाई गई है। यह मामला बतौली विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जुड़ा हुआ है, जहाँ आरोपी ने ऐरियर्स राशि के भुगतान के लिए यह रिश्वत मांगी थी।
मामला क्या था?
जानकारी के अनुसार, बरनाबस मिंज नामक एक सेवानिवृत्त प्रधान पाठक ने 17 नवंबर 2020 को एसीबी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि वे 28 फरवरी 2017 को पूर्व माध्यमिक विद्यालय घोघरा से प्रधान पाठक के पद से रिटायर हुए थे। सेवानिवृत्ति के पश्चात उन्हें केवल ग्रेच्युटी के रूप में 15 लाख रुपये की राशि मिली थी, जबकि अवकाश नगदीकरण के लिए 6 लाख रुपये और सातवें वेतनमान के ऐरियर्स की 1 लाख रुपये की राशि का भुगतान बाकी था।
रिश्वत की मांग की गई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी लेखापाल प्रमोद गुप्ता ने बरनाबस मिंज से 60,000 रुपये की मांग की थी ताकि अवकाश नगदीकरण की राशि का बिल बना सके, तथा 10,000 रुपये की मांग की थी ताकि सातवें वेतनमान के ऐरियर्स का बिल तैयार कर सके। जब मिंज ने शिकायत दर्ज कराई, तो एसीबी ने इस मामले की सत्यापन कार्रवाई की।
आरोपी की गिरफ्तारी
30 दिसंबर 2020 को, बरनाबस मिंज को 10,000 रुपये रिश्वत के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। मामले की जांच पूरी होने के बाद 16 जुलाई 2021 को आरोपी के खिलाफ विशेष न्यायालय में चार्जशीट दायर की गई। आज अदालत ने प्रमोद गुप्ता को तीन साल की कारावास और 5,000 रुपये के वित्तीय दंड से दंडित किया है।
निष्कर्ष
यह मामला छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासनिक कड़े कदमों की पुष्टि करता है। न्यायालय के इस निर्णय से यह संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार को किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाएगा और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी। अधिकारियों के लिए यह एक चेतावनी है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का उचित निर्वहन करें और जनहित को ध्यान में रखें।
