सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल: जब आरोप CM और सरकार पर हो, क्या ED राहत के लिए राज्य पुलिस का दरवाजा खटखटाए?

बड़ी खबर: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री पर ईडी की याचिका पर सुनवाई की

दिल्ली। 24 मार्च 2026 | आज सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ दायर याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई की। न्यायालय ने पूछताछ की कि जब आरोप राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर हों, तब क्या ईडी को राहत के लिए उसी राज्य सरकार के पास जाना उचित है।

मामले का परिचय

इस याचिका पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने सुनवाई की। याचिका को अनुच्छेद 32 के तहत दायर किया गया है, जिसमें ईडी ने आई-पैक कार्यालय पर की गई छापेमारी के दौरान कथित बाधा को लेकर CBI जांच की मांग की है।

सुनवाई में उठे सवाल

सुनवाई के दौरान, सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने राज्य सरकार की ओर से आपत्ति जताते हुए कहा कि ईडी अनुच्छेद 32 का सहारा नहीं ले सकती। सिब्बल ने यह भी कहा कि यदि किसी अधिकारी को कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा आती है, तो उसे भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह तर्क दिया कि ऐसे मामलों में राज्य पुलिस ही जांच कर सकती है।

सीनियर एडवोकेट सिब्बल की दलीलों के बाद, अदालत ने टिप्पणी की कि यदि मुख्यमंत्री जांच में हस्तक्षेप करने के आरोपी हैं, तो क्या ईडी उसी राज्य सरकार से राहत की गुहार कर सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि ईडी के अधिकारी नागरिक होने के नाते अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर कर सकते हैं।

मामला क्या है?

ईडी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कुछ राजनीतिक नेताओं और पुलिस अधिकारियों के साथ, छापेमारी के दौरान मौके पर पहुंचीं और जांच प्रक्रिया में बाधा डाली। इस पर राज्य सरकार ने विरोध प्रकट किया, stating that they received information that certain people were entering the premises posing as central agency officials.

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने राज्य को यह भी निर्देश दिया है कि वे CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखें। इस मामले की आगे की सुनवाई अप्रैल में होगी, जिसमें अनुच्छेद 32 के तहत याचिका की ग्राह्यता पर विस्तृत बहस होगी।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई से स्पष्ट होता है कि राजनीतिक और कानूनी जटिलताएँ एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार के बीच बढ़ती हुई दरार को उजागर कर रही हैं। आगे की सुनवाई और अदालत की टिप्पणियां इस मामले की दिशा तय करेंगी, जबकि कई राजनीतिक नज़रे इस मामले पर बनी रहेंगी।

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