ईंट-भट्ठों में मजदूरों के कथित शोषण का मामला, अग्रिम रकम देकर उत्तर प्रदेश भेजने और मारपीट-धमकी देने के आरोप
महासमुंद/नुआपाड़ा। छत्तीसगढ़ में ईंट-भट्ठा मजदूरों के पलायन से जुड़े कथित नेटवर्क के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद अब ओडिशा पुलिस ने भी इस दिशा में कार्रवाई की है। नुआपाड़ा पुलिस ने मजदूरों को ईंट-भट्ठों में काम दिलाने के नाम पर कथित शोषण, बंधक बनाने, मारपीट और धमकी देने के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में महासमुंद जिले के दो कारोबारी भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को 17 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब छत्तीसगढ़ में भी मजदूरों के पलायन से जुड़े कथित नेटवर्क के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की थी। महासमुंद पुलिस ने 25 सितंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया था कि भट्ठा दलालों के कथित नेटवर्क से जुड़े 10 ठिकानों पर छापेमारी कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उस कार्रवाई में 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नकद सहित मजदूरों से संबंधित रजिस्टर, डायरी, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए थे। पुलिस ने इन सामग्रियों की जांच के जरिए नेटवर्क से जुड़े लोगों और मजदूरों के पलायन के तौर-तरीकों की पड़ताल करने की बात कही थी।
अग्रिम रकम देकर मजदूरों को उत्तर प्रदेश भेजने का आरोप
नुआपाड़ा पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ श्रमिक सरदार वर्ष 2021 से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को अग्रिम राशि देकर उत्तर प्रदेश के ईंट-भट्ठों में काम करने के लिए भेज रहे थे। शिकायत में कहा गया है कि वहां काम करने के दौरान शिकायतकर्ता के माता-पिता को कथित तौर पर अमानवीय परिस्थितियों में रखा गया। उनकी आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने और श्रम शोषण के आरोप भी लगाए गए हैं।
शिकायत के मुताबिक, सितंबर 2024 में शिकायतकर्ता के पिता और बड़े भाई को कथित तौर पर जबरन बाराकोठी गांव ले जाया गया। वहां उनके साथ मारपीट की गई और रकम लौटाने को लेकर धमकी दी गई। परिवार ने ईंट-भट्ठे में काम करने जाने से इनकार किया तो गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने का भी आरोप है।
महासमुंद जिले के बसना और तेंदुकोना के आरोपी शामिल
नुआपाड़ा पुलिस ने जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें तीन ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के निवासी हैं, जबकि दो आरोपी छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में गोलू उर्फ नीलकमल चंद्राकर (38), मुलचंद सबर (35) और सानोज लोहार (34) शामिल हैं। ये क्रमशः बेल्टुकुरी, बेल्टुकुरी और पांड्रापानी के निवासी बताए गए हैं।
वहीं, महासमुंद जिले के तेंदुकोना निवासी संतोष अग्रवाल (42) और बसना निवासी अनूप अग्रवाल (47) को भी गिरफ्तार किया गया है।
जांच के बाद गिरफ्तारी, आगे की पड़ताल जारी
पुलिस के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद गवाहों के बयान दर्ज किए गए, घटनास्थल का निरीक्षण किया गया और संबंधित साक्ष्य एकत्र किए गए। इसके बाद पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर मेडिकल जांच के बाद न्यायालय में पेश किया गया।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और अंतरराज्यीय प्रवासी कामगार (नियोजन एवं सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1979 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है।
मजदूरों के पलायन पर कार्रवाई, लेकिन नेटवर्क की कड़ियां जांच का विषय
छत्तीसगढ़ और ओडिशा में हुई इन कार्रवाइयों से ईंट-भट्ठों में काम करने के लिए मजदूरों के पलायन से जुड़े कथित शोषण के मामलों पर पुलिस की सक्रियता सामने आई है। हालांकि, दोनों राज्यों की कार्रवाइयों के बीच प्रत्यक्ष संबंध होने की पुष्टि उपलब्ध प्रेस विज्ञप्तियों से नहीं होती है। नुआपाड़ा मामले में भी गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना बाकी है।
मजदूरों को अग्रिम राशि देकर दूसरे राज्यों में काम पर भेजने की व्यवस्था, उनके कामकाज की परिस्थितियां और कथित बिचौलियों की भूमिका जांच के महत्वपूर्ण पहलू हैं। अब आगे की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस मामले में कितने लोग प्रभावित हुए और कथित नेटवर्क की पहुंच कितनी दूर तक है।


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