तेहरान/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (Middle East) में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्थाओं को हिलाकर रख दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, वहां बढ़ते हमलों और संभावित ब्लॉकेड (रास्ता बंद होने) की खबरों ने ईंधन की कीमतों में आग लगा दी है।
पाकिस्तान ने जहाँ पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि की है, वहीं भारत में रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है।
पाकिस्तान: ₹55 की ऐतिहासिक बढ़ोतरी, हाहाकार जैसे हालात
आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह युद्ध ‘कोढ़ में खाज’ जैसा साबित हो रहा है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने शनिवार को घोषणा की कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और होर्मुज संकट के कारण कीमतें बढ़ाना मजबूरी है।
नई कीमतें एक नजर में:
| उत्पाद | पुरानी कीमत (PKR) | नई कीमत (PKR) | बढ़ोतरी |
| पेट्रोल | ₹266.17 | ₹321.17 | +₹55 |
| डीजल | ₹280.86 | ₹335.86 | +₹55 |
प्रमुख कदम: * सरकार अब हर 15 दिन के बजाय हर हफ्ते तेल की कीमतों की समीक्षा करेगी।
पाकिस्तान ने सऊदी अरब से ‘रेड सी’ (लाल सागर) के रास्ते वैकल्पिक तेल आपूर्ति की गुहार लगाई है ताकि होर्मुज के रास्ते पर निर्भरता कम हो सके।
भारत: LPG सिलेंडर ₹60 महंगा, लेकिन तेल की कीमतें स्थिर
भारत में भी इस संकट का असर घरेलू स्तर पर दिखने लगा है। 7 मार्च 2026 से घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतों में ₹60 प्रति सिलेंडर का इजाफा किया गया है।
भारत की स्थिति और रणनीतिक तैयारी:
पेट्रोल-डीजल: फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, तेल कंपनियों के पास पुराने स्टॉक का बफर है जो फिलहाल कीमतों को स्थिर रखने में मदद कर रहा है।
diversified Sourcing: भारत अपनी जरूरत का केवल 40% तेल होर्मुज के रास्ते मंगाता है। बाकी आपूर्ति रूस, अमेरिका और अफ्रीका जैसे वैकल्पिक रास्तों से हो रही है, जिससे भारत पाकिस्तान की तुलना में अधिक सुरक्षित स्थिति में है।
भंडारण: भारत के पास लगभग 25 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार सुरक्षित है, जिससे किसी भी अल्पकालिक सप्लाई बाधा से निपटा जा सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) क्यों है ‘डेडलाइन’?
यह पतला समुद्री रास्ता ईरान और ओमान के बीच स्थित है। अगर ईरान इसे पूरी तरह बंद करता है, तो:
वैश्विक तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।
शिपिंग इंश्योरेंस (बीमा) की लागत ₹25 लाख से बढ़कर ₹3 करोड़ प्रति जहाज तक पहुँच गई है।
चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे तेल-आयातकों के लिए ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।
आम जनता पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो:
महंगाई: ट्रांसपोर्ट महंगा होने से फल, सब्जियां और जरूरी सामानों की कीमतें 10-15% तक बढ़ सकती हैं।
शेयर बाजार: अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है, जिससे बाजार में गिरावट आ सकती है।
रुपये की गिरावट: डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये और पाकिस्तानी रुपये की कीमत गिर सकती है।
विशेषज्ञों की राय: “भारत अपनी विविधतापूर्ण तेल खरीद नीति के कारण सुरक्षित है, लेकिन पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था इस झटके को सहन नहीं कर पाएगी, जिससे वहां गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा है।”
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