महासमुंद। मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामले में शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला बेमचा में पदस्थ व्याख्याता श्रीमती किरण पटेल के खिलाफ शिक्षा विभाग ने औपचारिक रूप से संज्ञान ले लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी, महासमुंद द्वारा इस संबंध में जांच आदेश जारी करते हुए संबंधित शिक्षिका से 15 दिवस के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिकायत के बाद जारी हुआ आधिकारिक पत्र
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय महासमुंद द्वारा 01 जनवरी 2026 को जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता श्री पंकज साहू, छत्तीसगढ़ नागरिक कल्याण समिति सदस्य एवं पूर्व पार्षद द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। शिकायत में आरोप है कि श्रीमती किरण पटेल, व्याख्याता, शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला बेमचा ने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का अनुचित लाभ लिया।
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जानें पत्र में क्या कहा?
जारी आदेश में कहा गया है कि—श्रीमती किरण पटेल के विरुद्ध मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना अंतर्गत अपात्र होते हुए लाभ लेने की शिकायत प्राप्त हुई है शिकायत में योजना के आवेदन के दौरान झूठा घोषणा पत्र प्रस्तुत करने और स्वयं को बीपीएल श्रेणी का दर्शाने का आरोप है शिकायत की जांच आवश्यक होने के कारण संबंधित शिक्षिका को अपना पक्ष, साक्ष्य एवं अभिमत सहित 15 दिवस के भीतर कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं जिला शिक्षा अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयावधि में जवाब प्राप्त नहीं होने की स्थिति में एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है।
शासकीय सेवा में रहते योजना लाभ का आरोप
शिकायत के अनुसार, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना समाज कल्याण विभाग द्वारा 65 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों के लिए संचालित की जाती है, जिसमें शासकीय सेवक पात्र नहीं होते। इसके बावजूद आरोप है कि 27 अक्टूबर 2025 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच प्रयागराज, काशी विश्वनाथ एवं हनुमान मंदिर की तीर्थ यात्रा में एक अपात्र महिला, जो वर्तमान में शासकीय सेवा में कार्यरत हैं, ने योजना का लाभ लिया।
गंभीर कदाचार मानते हुए कार्रवाई की मांग
पूर्व पार्षद पंकज साहू ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए शिक्षिका को निलंबित कर विभागीय जांच, सेवा से बर्खास्तगी और पुलिस थाना महासमुंद में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का दावा है कि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर
शिक्षा विभाग द्वारा पत्र जारी किए जाने के बाद यह मामला प्रशासनिक स्तर पर औपचारिक जांच के दायरे में आ गया है। अब सभी की निगाहें संबंधित शिक्षिका द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब और उसके बाद विभाग द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।








