हर्मुज स्ट्रेट संकट: मिडिल ईस्ट युद्ध में फंसे भारत के 28 तेल-गैस टैंकर, रसोई गैस पहुंचाने की नई रणनीति की तलाश!

ब्रेकिंग न्यूज़: होर्मुज स्ट्रेट में फंसे तेल और गैस टैंकरों का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू

नई दिल्ली: भारत सरकार, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट में रुके 28 तेल और गैस टैंकरों को सुरक्षित निकालने के लिए एक व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गई है। इनमें 10 विदेशी एवं 18 भारतीय झंडे वाले टैंकर शामिल हैं। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, अब तक कुल 8 जहाजों को सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाला जा चुका है। राहत की बात यह है कि दो जहाज, ‘BW TYR’ और ‘BW ELM’, 31 मार्च और 1 अप्रैल को 94,000 टन LPG लेकर भारत पहुंचने वाले हैं, जिससे देश में चल रहे गैस संकट में महत्वपूर्ण राहत मिलेगी।

समुद्र में फंसे जहाजों का विवरण

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव, राजेश कुमार सिन्हा ने मीडिया को जानकारी दी है कि फारस की खाड़ी में कुल 28 जहाज फंसे हुए हैं। इनमें 10 विदेशी और 18 भारतीय झंडे वाले टैंकर शामिल हैं:

  • विदेशी झंडे वाले जहाज: 3 LPG, 4 तेल टैंकर और 3 LNG कैरियर।
  • भारतीय झंडे वाले जहाज: 3 LPG टैंकर, 1 LNG कैरियर, 4 कच्चे तेल टैंकर और 1 खाली LPG टैंकर। इन जहाजों पर कुल 485 क्रू मेंबर भी मौजूद हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन का वर्तमान स्थिति

मंत्री सिन्हा के अनुसार, इस समय होर्मुज स्ट्रेट में लगभग 500 कमर्शियल जहाज फंसे हुए हैं। भारत सरकार की प्राथमिकता भारतीय झंडे वाले जहाजों को संरक्षित करना है। अब तक 8 भारतीय झंडे वाले जहाजों को सुरक्षित किया जा चुका है।

  • 31 मार्च और 1 अप्रैल: BW TYR और BW ELM 94,000 टन LPG लेकर भारत आ रहे हैं।
  • 26 मार्च: पाइन गैस और जग वसंत ने 92,612 टन LPG लेकर सुरक्षित वापसी की।
  • 16-17 मार्च: एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी ने 92,712 टन LPG लेकर मुंद्रा और कांडला पोर्ट पहुंचे।
  • 18 मार्च: जग लाडकी ने 80,886 टन कच्चा तेल मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचाया।

होर्मुज स्ट्रेट का महत्व

मिडिल ईस्ट का होर्मुज स्ट्रेट विश्व की ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख चोकपॉइंट है। लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक मार्केट और भारत का 50 प्रतिशत तेल और गैस आयात इसी मार्ग से होता है। राजेश कुमार सिन्हा ने चेतावनी दी है कि न केवल होर्मुज, बल्कि इसके आसपास का क्षेत्र भी उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में उभरा है। भारतीय नौसेना इस रूट पर कड़ी निगरानी रखे हुए है ताकि भारत की सप्लाई श्रृंखला प्रभावित न हो।

निष्कर्ष

भारत सरकार का यह रेस्क्यू ऑपरेशन न केवल जुटे जहाजों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर नजर रखना और सक्रिय कदम उठाना समय की जरूरत है। सरकार और नौसेना का यह प्रयास भारत को ऊर्जा संकट से उबारने में अहम भूमिका निभाएगा।

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