अमेरिका-ईरान युद्ध: भारत रूस से LNG आयात फिर से शुरू करने की तैयारी!

ब्रेकिंग न्यूज़: भारत ने रूस से तरलीकृत गैस खरीदने के लिए अमेरिका से मांगी छूट
भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हो रही आपूर्ति बाधाओं के बीच, अमेरिका से रूस से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) खरीदने के मामले में छूट की मांग की है। यह जानकारी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

भारत का LNG खरीदने का कदम

रिपोर्ट के अनुसार, भारत और रूस ने आपसी सहमति से तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति फिर से शुरू करने के लिए तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। यह कदम उस समय उठाया जा रहा है जब यूक्रेन युद्ध के कारण आपूर्ति में बाधा आई हुई है। एक सूत्र ने बताया कि यदि भारत इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो चर्चा कुछ ही हफ्तों में समाप्त हो सकती है, हालांकि इस तरह की व्यवस्था पश्चिमी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर सकती है।

ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम

इस मसले पर चर्चा भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और रूस के उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन के बीच 19 मार्च को नई दिल्ली में हुई थी। सूत्रों के अनुसार, भारत ने घरेलू ऊर्जा आयातकों को भी रूस से LNG खरीदने की संभावनाओं के लिए तैयार रहने की सलाह दी है। साथ ही, अमेरिका से भी प्रतिबंधों से छूट प्राप्त करने के लिए बातचीत की जा रही है।

एक और सूत्र ने बताया कि हाल के अनुबंध भारत के लिए कम लाभदायक हो सकते हैं, खासकर जब रूस की गजप्रो के साथ 2012 में हुई दीर्घकालिक आपूर्ति संधि की तुलना की जाए। वर्तमान में यह एक विक्रयकर्ता की बाजार स्थिति है, जो भारतीय रणनीति पर प्रभाव डाल सकती है।

मध्य पूर्व संघर्ष से प्रभावित वैश्विक LNG आपूर्ति

मध्य पूर्व के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले ने भी LNG आपूर्ति में प्रभाव डाला है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि देखने को मिली है। इस संघर्ष के परिणामस्वरूप, खाड़ी देशों में महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिससे LNG उत्पादन और आपूर्ति पर चिंता बढ़ गई है।

इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि यह गैस मूल्य संकट कुछ देशों को गैस की मांग को पूर्वानुमान से कम करने पर विचार करने के लिए मजबूर करेगा। यह स्थिति विशेष रूप से एशियाई बाजारों में कीमत-संवेदनशील खरीदारों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

भविष्य की संभावनाएँ

विशेषज्ञों की मान्यता है कि अगर स्थिति में सुधार नहीं होता, तो कानूनी और आपूर्ति संबंधी चुनौतियाँ जारी रहेंगी। खाड़ी देशों में हो रही घटनाओं ने वैश्विक LNG बाजार को बाधित किया है, जिससे उच्च कीमतें, प्रमुख निर्यात सुविधाओं में रुकावट और संभावित परियोजनाओं में देरी का सामना करना पड़ रहा है।

इस परिस्थितियों को देखते हुए, भारतीय रणनीति में LNG के स्थायी मौलिक बदलाव की आवश्यकता हो सकती है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखा जा सके और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा की सोच को मजबूती दी जा सके।

इन सभी विकासों के बीच, भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाते हुए अन्य देशों के साथ भी बातचीत कर रहा है। इस संदर्भ में, भारत की ऊर्जा नीति और रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं।

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