ब्रेकिंग न्यूज़: भारत में तकनीकी खर्च में तेजी का अनुमान, 2026 में 13.4% की वृद्धि!
नई दिल्ली: भारत की तकनीकी खर्च में 2026 तक 13.4% की वृद्धि का अनुमान है, जो कि 2025 की 13.7% की वृद्धि से थोड़ा कम है। यह जानकारी फॉरेस्टर, कैम्ब्रिज स्थित अनुसंधान फर्म द्वारा 27 मार्च 2026 को प्रकाशित की गई है।
भारत का तकनीकी माहौल
फॉरेस्टर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तकनीकी खर्च में सबसे आगे रहेगा। लेकिन, बढ़ती लागत और कुछ नियामकीय चुनौतियां वास्तविक वृद्धि पर प्रभाव डाल सकती हैं। फर्म ने चेतावनी दी है कि बढ़ती तकनीकी लागत, परिवर्तनशील हार्डवेयर बाजार, ऊर्जा आपूर्ति में विघटन और संप्रभुता के नियम खरीदारी की शक्ति को प्रभावित कर सकते हैं।
तेजी से बढ़ता बाजार
फॉरेस्टर के अनुसार, भारत, एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। यहाँ क्लाउड सेवाओं को तेजी से अपनाया जा रहा है और डेटा स्थानीयकरण नियमों के चलते महत्वपूर्ण स्थानीय आधारभूत ढांचा निवेश हो रहा है। साथ ही, सॉफ्टवेयर निवेश में भी वृद्धि हो रही है क्योंकि विक्रेता AI क्षमताओं को मूल्य निर्धारण में समाहित कर रहे हैं।
फॉरेस्टर के उपाध्यक्ष और अनुसंधान निदेशक, अशुतोष शर्मा ने कहा, "भारत का दो अंकों में तकनीकी खर्च तेजी से बढ़ रहा है, जो क्लाउड में तेजी, नियामकीय स्पष्टता और मजबूत घरेलू मांग का परिणाम है।" उन्होंने यह भी बताया कि डेटा स्थानीयकरण के कारण आधारभूत ढांचा रणनीतियाँ बन रही हैं और कंपनियाँ AI-तैयार प्लेटफार्मों का विस्तार कर रही हैं।
भविष्य के लिए तकनीकी निवेश
फॉरेस्टर का अनुमान है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 2025 से 2030 के बीच नई तकनीक पर $437 बिलियन से अधिक का खर्च होगा। तकनीक पर कुल खर्च 9.3% बढ़ेगा, जिसमें सॉफ्टवेयर, सेवाएँ, संचार उपकरण, और तकनीकी आउटसोर्सिंग में निवेश शामिल है।
हालांकि, लागत के दबाव जैसे कि सॉफ्टवेयर महंगाई और हार्डवेयर की वृद्धि, नियामकीय विखंडन, टैरिफ, ऊर्जा के झटके, क्षेत्रीय विकास में असमानता और कौशल की कमी जैसे फैक्टर इस निवेश के वास्तविक प्रभाव को कम कर सकते हैं।
भारत की तकनीकी विकास की कहानी तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन इस प्रक्रिया में कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ेगा। संभावित विकास के लिए संगठनों को ना केवल अपने समझौतों में वृद्धि करनी होगी, बल्कि उन्हें अपने डिजिटल प्रक्रियाओं को भी सुदृढ़ करना होगा।
रिपोर्ट से स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में भारत तकनीकी क्षेत्र में एक मजबूत खिलाड़ी बना रहेगा, लेकिन इसके लिए दिशा और रणनीति का सही निर्माण भी आवश्यक होगा।
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