ब्रेकिंग न्यूज़: इंडिगो की परिचालन आपदा ने उड़ानें रद्द कीं
नई दिल्ली: भारतीय विमानन क्षेत्र में इंडिगो और एयर इंडिया का वर्चस्व कायम है। हाल के एक बड़े परिचालन संकट ने हजारों यात्रियों को परेशान कर दिया, जिससे परिवारों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
भारत की विमानन मार्केट में दोहन
संसद में सोमवार को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री मुरलीधर मोहाल ने बताया कि इंडिगो और एयर इंडिया के पास भारतीय विमानन बाजार का 90% हिस्सा है। इनमें से अकेले इंडिगो का हिस्सा 60% से अधिक है। उन्होंने कहा कि 2025 के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो का बाजार हिस्सा लगभग 64% और एयर इंडिया समूह का 27% है।
मोहल ने कहा, "ये दोनों विमानन कंपनियां मिलकर 91% घरेलू बाजार पर नियंत्रण रखती हैं।" जनवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, अन्य घरेलू एयरलाइंस जैसे भारत सरकार की अलाइंस एयर का हिस्सा 0.4%, आकासा एयर का 4.8% और स्पाइस जेट का 3.9% है।
दिसंबर में उड़ानों में रुकावट
इंडिगो की दिसंबर 2025 में उड़ानों में रुकावट के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि इस अवधि में कंपनी ने 5,689 घरेलू उड़ानें रद्द की थीं। उन्होंने बताया कि 3 से 5 दिसंबर के बीच 3,64,933 यात्रियों पर इसका असर पड़ा और इंडिगो ने इस संबंध में 4,620.5 लाख रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान किया है।
मंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी रद्द की गई उड़ानों के लिए रिफंड प्रक्रिया पूरी कर दी गई है। हालांकि, सरकार के पास रद्द उड़ानों के कारण किस एयरलाइन को कितना नुकसान हुआ, इस संबंध में कोई डेटा नहीं है।
संकट का मुख्य कारण और यात्रियों की प्रतिक्रिया
इंडिगो ने अपनी रद्द उड़ानों के लिए कारण बताते हुए कहा कि क्रू की कमी के कारण उसे एक हजार से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि आमतौर पर वह 2,200 से अधिक उड़ानें प्रतिदिन संचालित करती है। यह विघटन शादी के सीजन के दौरान हुआ, जिसके कारण यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई थी।
डीजीसीए ने कंपनी को शो-कॉज नोटिस जारी किया था, लेकिन इंडिगो अधिकारियों ने इस संकट का सही कारण बताने में असमर्थता जताई। इस संकट के पीछे नए उड़ान ड्यूटी समय प्रतिबंध (FDTL) नियमों को एक कारण बताया गया है, जो पायलटों और कैबिन क्रू को अधिक आराम प्रदान करते हैं।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच का आदेश दिया था, साथ ही इंडिगो को ठीक होने के लिए कुछ नियमों में शिथिलता दी गई। यात्रियों ने सोशल मीडिया पर रद्द उड़ानों की आलोचना की, कुछ ने इसे बाजार के एकाधिकार का परिणाम बताया।
जबकि विपक्षी दलों ने 2023 में इंटरग्लोब एविएशन द्वारा किए गए चुनावी बांडों की खरीदारियों पर सवाल उठाए हैं। इंटरग्लोब एविएशन और अन्य सहयोगियों ने मिलकर 36 बांडों की खरीद की थी, जो प्रति बांड 1 करोड़ रुपये के थे।
इस संकट ने इंडिगो के भविष्य और भारतीय विमानन क्षेत्र में उसकी स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
