इज़राइल का फांसी देने का कानून: केवल Palestiniyaan पर लागू

ब्रेकिंग न्यूज़: इज़राइल के संसद ने पास किया विवादास्पद कानून

इज़राइल की संसद ने एक ऐसा विधेयक पारित किया है, जो पैलेस्टीनियों को घातक हमलों के लिए मृत्युदंड देने का प्रावधान करता है। इस कदम ने पैलेस्टीनियों में आशंका पैदा की है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा व्यापक निंदा की गई है।

कानून का प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

इस नए कानून का मुख्य लक्ष्य केवल पैलेस्टीनियों को प्रभावित करना है, जो इज़राइल के विभिन्न मानवाधिकार समूहों द्वारा "अपराटheid" प्रणाली का गहरा हिस्सा बताया जा रहा है। यह कानून यहूदी नागरिकों पर लागू नहीं होता, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कानून का उद्देश्य पैलेस्टीनियों को ही लक्षित करना है।

फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों ने इस बिल के स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण स्वभाव पर चिंता व्यक्त की है। इन देशों के विदेश मंत्रालयों ने संयुक्त बयान में कहा है कि यह कानून डेमोक्रेटिक सिद्धांतों के प्रति इज़राइल के प्रतिबद्धता को कमजोर कर सकता है।

ऐम्नेस्टी इंटरनेशनल ने भी इस बिल की आलोचना की है, यह कहते हुए कि यह पैलेस्टीनियों के खिलाफ एक भेदभावपूर्ण उपकरण बनेगा। उनके अनुसार, मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हुए, यह कानून इज़राइल की न्यायिक प्रणाली में दो स्तरों को और भी मजबूती से स्थापित करेगा।

कानून की वैधता पर सवाल

कई विशेषज्ञ यह मानते हैं कि यह कानून वैध नहीं है। इज़राइल का यह कदम अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह विधायिका एक ऐसे क्षेत्र में कानून पारित कर रही है, जो उसकी संप्रभुता में नहीं आता। 2018 का नेशन स्टेट कानून भी इस बात का समर्थन करता है कि इज़राइल सिर्फ यहूदी लोगों का राष्ट्र है, जिससे पैलेस्टीनियों की नागरिकता का दर्जा गिरता है।

इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इज़राइल से अपील की थी कि वह पैलेस्टीन पर अपने सैन्य कब्जे को समाप्त करे। इज़राइल के मानवाधिकार समूह, एसोसिएशन ऑफ सिविल राइट्स, ने इस विधेयक को इज़राइल की सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी है।

क्या यह पहली बार है कि इज़राइल पर पैलेस्टीनियों के खिलाफ अपने कानून का प्रयोग करने का आरोप लगा है?

बिल्कुल नहीं। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि इज़राइल की न्यायिक प्रणाली हमेशा से पैलेस्टीनियों और इजरायली स्थापना के बीच असमानताओं पर आधारित रही है। पैलेस्टीनियों को सैन्य कानून के तहत रखा जाता है जबकि इज़राइली बस्तियों को नागरिक कानून के तहत न्याय मिलता है। इसके चलते, अलग-अलग सिस्टम की वजह से भेदभावपूर्ण गिरफ्तारियों, विशेष अधिकारों की असमानता और कानूनों के भेदभावपूर्ण कार्यान्वयन का आधार बना है।

मार्च 2026 तक, करीब 9,500 पैलेस्टीनियों को इज़राइली जेलों में कठिन परिस्थितियों में रखा गया है, जिसमें से लगभग आधे को प्रशासनिक निरोधन के तहत रखा गया है। इसके अलावा, पैलेस्टीनियन बच्चों को हिरासत में रखने के संबंध में कानून भी अंतरराष्ट्रीय ध्यान का विषय बने हुए हैं। ये बच्चे अक्सर बिना अभिभावक की उपस्थिति में पूछताछ का सामना करने के लिए मजबूर होते हैं।

इस तरह के कानून और प्रवर्तन की समय सीमा इज़राइल की "अपराटheid" प्रणाली को मजबूत करती है, जिससे न केवल पैलेस्टीनियों की स्थिति और कठिन होती जा रही है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इज़राइल की छवि को भी धूमिल कर रही है।

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