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महासमुंद, डिग्री बाटने की बाढ़, डिग्रीधारी शिक्षा विभाग को अंधेरे में रख उठा रहे फायदा!

देश में कई निजी विश्वविद्यालय पर्दे के पीछे फर्जी डिग्री के सहारे उच्च शिक्षा में मानद उपाधि के नाम से  होटल चौक चौराहे में  रंगीन मानद उपाधि पत्र गाउन के साथ बाटी जा रही है एवम समाचार पत्र में प्रकाशित भी हो रही है।

महासमुंद जिले में इस प्रकार की डिग्री बाटने की बाढ़ आ गई है। जानकारी के अनुसार  कुछ दलाल सक्रिय है जो पढ़े लिखे, ज्यादातर शासकीय सेवा में जुड़े व्यक्तियों से संपर्क कर 20 से 40 हजार रुपए में  चमचमाती सर्टिफिकेट पोस्टल पर भेज देते है या किसी होटल में गाउन के साथ फोटो खींचकर प्रकाशित करते है इस प्रकार के फोटो ग्राफ्स स्कूल या चौराहे की फोटो मोबाइल ग्रुप में भेजे जा रहे है। जिससे उपाधि की गरिमा धूमिल हो रही है जो शिक्षा जगत के लिए चिंता का विषय है।

यह बताना भी जरूरी है कि पीएचडी उपाधि के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातकोत्तर 55 प्रतिशत एवम इंट्रेंस एग्जाम  के बाद प्रवेश की पात्रता होती है ,यूजीसी के गाइड लाइन का पालन करते हुए क्लास अटेंड, 6 मंथली कोर्स,शोध कार्य का लेखन आदि के साथ कम से कम 4 वर्ष एवम 5 से 6 लाख का खर्च आ जाता है, वही दूसरी ओर बिना योग्यता के रातो रात डिग्री का देना असहज लगता है।

समस्या की गंभीरता इतनी है कि ऐसे डिग्रीधारी को शिक्षा विभाग द्वारा सेवा पुस्तिका में संधारण कर 2 वेतन वृद्धि प्रदान की जा रही है, इसकी जानकारी सरायपाली के एक पीएचडी धारी व्याख्याता डा अनिल प्रधान ने जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद को उनके ही पत्र क्रमांक 1492/स्था 2/अ ना प्र पा/2023 – 24 महासमुंद दि 20/03/24 का हवाला देते हुए मानद उपाधि की जांच करने, नाम के सम्मुख डाक्टर लिखने पर आपत्ति दर्ज की है,उन्होंने कहा की ऐसे डिग्री वितरण से वास्तविक शोधार्थियों में ह्ताशा होगी और शिक्षा जगत पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।  शिक्षा विभाग को सत्यता की जांच कर आवश्यक कदम उठाना चाहिए।

वित्तीय लाभ प्राप्त करना उचित नहीं

मानद उपाधियां अपने कार्य क्षेत्र में निरंतर उल्लेखनीय कार्य का सम्मान करते हुए मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय भी प्रदान करतीं हैं किन्तु इसमें इसे रेखांकित किया जाना आवश्यक है कि यह मात्र सम्मान प्रदर्शित करने के लिए दी जाती है ‌न कि किसी वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए कोई इसका उपयोग करे। सेवा पुस्तिका में इसकी प्रविष्टि करना मुझे लगता है उचित नहीं है।  दो वेतन वृद्धि का प्रावधान विधिवत शोधकार्य जिसकी‌अनुमति ( सेवाकाल में की हो तो) विभाग से मिली हो, तथा उसके शिक्षण को संवर्धित करने में उपयोगी है ,तो उसे पात्रता है तथा उसकी प्रविष्टि सेवा पुस्तिका में की‌ जाती है। और अधिक जानकारी शिक्षा संहिता से प्राप्त की जा सकती है।

समीर चन्द्र प्रधान प्राचार्य सेजेस पटेवा

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