भारत में सौर ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि
भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र में एक नई उड़ान भरने की खबर सामने आई है। 2025 में करीब 119 गीगावॉट सौर मॉड्यूल और 9 गीगावॉट सौर सेल क्षमता की बढ़ोतरी हुई है। यह जानकारी ‘मेरकम इंडिया’ की हालिया रिपोर्ट से सामने आई है।
सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि
मेरकम इंडिया की "स्टेट ऑफ सोलर पीवी मैन्युफैक्चरिंग इन इंडिया 2026" रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में देश की विशाल सौर परियोजनाओं की मांग, आवासीय छत के लक्ष्यों और प्रधानमंत्री सूर्या घर कार्यक्रम का इस वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसके साथ ही, घरेलू सेल मान्यता के तहत "एप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स लिस्ट-II" ने भी मदद की।
भारत ने 2025 में 547 मेगावाट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता जोड़ी, जो पिछले साल की तुलना में 26% की वृद्धि है। यह जानकारी ‘2H & एनुअल 2025 इंडिया एनर्जी स्टोरेज लैंडस्केप रिपोर्ट’ के अनुसार है। अब तक, भारत की कुल बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता 1,082 मेगावाट-घंटा तक पहुँच चुकी है।
सौर ओपन एक्सेस में सुधार
2025 में भारत ने 7.8 गीगावॉट की सौर ओपन एक्सेस क्षमता जोड़ी, जो किसी भी कैलेंडर वर्ष में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। सौर ओपन एक्सेस स्थापना में स्थिरता बनी रही, जो दीर्घकालिक नवीकरणीय ऊर्जा खरीद के लिए कॉर्पोरेट्स की बढ़ती मांग से समर्थित है। कंपनियां अब अपनी बिजली की लागत कम करने और स्थिरता के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हरी ऊर्जा खरीद को प्राथमिकता देने लगी हैं।
हालांकि, बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में कुछ चुनौतियाँ भी उभरकर सामने आ रही हैं। गर्म जलवायु में बैटरी की कार्यक्षमता पर पड़ने वाले प्रभावों को समझना आवश्यक हो गया है। भारत के कई नवीकरणीय ऊर्जा केंद्रों, जैसे राजस्थान और गुजरात, में गर्मी का स्तर अक्सर 40°C से ऊपर पहुँच जाता है।
व्यापार और ऊर्जा की चुनौतियाँ
हाल ही में भारत ने 2025-26 के वित्तीय वर्ष के लिए नए बिजली टैरिफ में वृद्धि की है, जिससे व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ा है। कर्नाटका के बिजली नियामक आयोग के फैसले से कई उपभोक्ताओं ने चिंता जताई है। इस निर्णय ने भारत के बिजली क्षेत्र में क्रॉस-सब्सिडीज की बहस को फिर से जीवित कर दिया है।
इस बीच, अमेरिका ने भारतीय सौर आयात पर भारी प्रतिकारी शुल्क लगाया है। इसके बावजूद, भारतीय सौर निर्माताओं ने घरेलू बाजार पर ध्यान केंद्रित करते हुए इसे गंभीर चिंता का विषय नहीं माना है।
भारत सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स के उत्पादन में वृद्धि का निर्देश दिया है, जिससे आगामी महीनों में बिजली की मांग में वृद्धि की उम्मीद है।
भारत का लक्ष्य है कि वह 2035 तक अपने उत्सर्जन की तीव्रता को 2005 के स्तर से 47% कम करे। इसके अतिरिक्त, 2035 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 60% हासिल करने का भी उद्देश्य है।
उपरोक्त चुनौतियों और अवसरों के बीच, भारत का सौर ऊर्जा क्षेत्र अपनी वैश्विक स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
