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नेपाल बाढ़ LIVE: चीन ने फिर दी ग्लेशियल झील टूटने की चेतावनी, हाई अलर्ट पर नेपाल; मौत का आंकड़ा 600 के करीब

Nepal Flood Live News: नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। अब तक करीब 600 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। अकेले नेपाल में 579 लोगों की मौत हुई है। वहीं तिब्बत के जिरोंग काउंटी में 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

रेस्क्यू टीमें मलबे में जिंदगी तलाश रही हैं, लेकिन अब उनके सामने एक नया खतरा मंडरा रहा है। पहाड़ों में मलबे के कारण बनी अस्थिर झीलों में पानी बढ़ रहा है। ऐसी किसी झील की प्राकृतिक दीवार टूटने पर अचानक दोबारा बड़ा सैलाब आ सकता है।

चीन ने फिर दी ग्लेशियल झील टूटने की चेतावनी

चीन ने नेपाल को ऊपरी ल्हेंडे नदी तंत्र में बनी एक ग्लेशियल झील को लेकर फिर अलर्ट किया है। चीनी अधिकारियों के मुताबिक झील के पानी का रंग लगातार गहरा हो रहा है, जो संभावित खतरे का संकेत माना जा रहा है।

चीन का अनुमान है कि झील टूटने की स्थिति में नदी में अधिकतम करीब 500 घन मीटर प्रति सेकंड पानी आ सकता है। हालांकि चीनी अधिकारियों ने कहा है कि इससे निचले इलाकों में जलस्तर में बहुत बड़ी वृद्धि की संभावना नहीं है। इसके बावजूद नेपाल के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

नेपाल में 579 मौतें, 1,924 लोग अब भी लापता

नेपाल में बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक देश के 8 जिलों में अब तक 579 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,924 लोग लापता हैं।

तिब्बत के जिरोंग काउंटी में भी हालात बेहद खराब हैं। यहां 7 मौतों की पुष्टि हुई है और करीब 554 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन मलबे, कीचड़, उफनती नदियों और अस्थिर चट्टानों के कारण रेस्क्यू टीमों के लिए हर कदम जोखिम भरा बना हुआ है।

540 से ज्यादा विदेशी नागरिक लापता

लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है। रिपोर्टों के मुताबिक 540 से ज्यादा विदेशी नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई तीर्थयात्री भी शामिल हैं।

भारत के लिए भी यह आपदा चिंता का विषय बनी हुई है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग और त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 कर्मचारी शामिल हैं।

इसके अलावा 149 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 400 भारतीय अभी चीन में सुरक्षित हैं। भारतीय दूतावास उनकी वापसी में सहायता कर रहा है। हालांकि करीब 320 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। बाढ़ के कारण टेलीकम्युनिकेशन व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।

Infosys के वरिष्ठ अधिकारी भी लापता

नेपाल में निजी यात्रा पर गए Infosys Public Services के प्रमुख Lax Gopisetty से भी फ्लैश फ्लड के बाद संपर्क नहीं हो पा रहा है।

Infosys ने कहा है कि Gopisetty को ढूंढना, उनसे संपर्क स्थापित करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना कंपनी की प्राथमिकता है। कंपनी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर उनकी जानकारी जुटा रही है। उनका परिवार भी कंपनी के संपर्क में है और उसे आवश्यक सहायता दी जा रही है।

आखिर इतनी भयावह बाढ़ कैसे आई?

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक तबाही की शुरुआत ग्लेशियर टूटने की घटना से हुई। बर्फ, चट्टान, मिट्टी और मलबे का विशाल हिस्सा अचानक नीचे की ओर आया और हिमालय की नदियों में भारी मात्रा में पानी तथा मलबा पहुंच गया।

तेज बहाव ने रास्ते में आने वाली सड़कों, पुलों और अन्य संरचनाओं को तहस-नहस कर दिया। कई इलाकों में घर और दूसरी संरचनाएं मोटी कीचड़ और मलबे के नीचे दब गईं।

लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

पहाड़ों में फिर जमा हो रहा पानी, नई बाढ़ का खतरा

बाढ़ के बाद भारी मलबे ने कई जगह नदियों का रास्ता रोक दिया। इससे बैरियर लेक यानी मलबे से बनी अस्थायी झीलें तैयार हो गई हैं। इन झीलों में लगातार पानी जमा हो रहा है।

शुक्रवार को ऐसी ही एक झील के ओवरफ्लो होने के बाद कुछ समय के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित हुआ। नेपाल पुलिस को तिब्बत की तरफ बांध टूटने की सूचना मिली थी, जिसके बाद बचावकर्मियों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाने के निर्देश दिए गए।

बाद में स्थिति स्थिर होने पर बचाव अभियान दोबारा शुरू किया गया। नेपाल फिलहाल ऊपर की ओर बनी दो बैरियर झीलों पर लगातार निगरानी रख रहा है।

वैज्ञानिकों की चिंता इसलिए बढ़ी हुई है क्योंकि सैटेलाइट तस्वीरों में एक झील का आकार बढ़ता दिखाई दे रहा है और उसके पानी के बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता नजर नहीं आ रहा है।

चीन में 100 से ज्यादा ग्लेशियल झीलों पर खतरा

चीनी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में 100 से ज्यादा ग्लेशियल झीलें संभावित जोखिम पैदा कर सकती हैं। अगर इनमें से किसी झील की प्राकृतिक दीवार टूटती है, तो अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर आ सकता है।

यही वजह है कि राहत और बचाव टीमों के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ उन्हें मलबे में लापता लोगों की तलाश करनी है, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ों से आने वाले नए खतरे पर भी लगातार नजर रखनी है।

तिब्बत में तबाही का खौफनाक मंजर

चीन के सरकारी मीडिया द्वारा जारी फुटेज में तिब्बत के जिरोंग पोर्ट में हुई तबाही का पैमाना दिखाई दे रहा है। रेस्क्यूकर्मी पहाड़ों, खड़ी चट्टानों और उफनती नदियों को पार कर प्रभावित इलाकों तक पहुंच रहे हैं।

चारों तरफ कीचड़ और चट्टानों का मलबा फैला हुआ है। रेस्क्यूकर्मी मलबे के बीच लोगों को तलाशते हुए लगातार आवाज लगा रहे हैं।

CCTV के अनुसार ग्यिरोंग पोर्ट के पुराने बॉर्डर गेट के आसपास मोटी कीचड़ की परत जम गई है। यह नेपाल-तिब्बत के बीच पर्यटकों और सामान की आवाजाही का प्रमुख मार्ग रहा है।

चीन में बाढ़ की तस्वीरें कम क्यों सामने आ रही हैं?

आपदा का एक और पहलू चर्चा में है। जिरोंग पोर्ट पर आई बाढ़ के कई दृश्य CCTV कैमरों में कैद हुए और सोशल मीडिया के जरिए दुनिया तक पहुंचे। इन वीडियो में पानी और मलबे का रौद्र रूप दिखाई देता है।

हालांकि चीन के भीतर इस आपदा से जुड़ी जानकारी और विजुअल अपेक्षाकृत सीमित होने की बात कही जा रही है। सरकारी मीडिया में भी तबाही की विस्तृत तस्वीरों के बजाय सीमित दृश्य दिखाए जाने की रिपोर्टें हैं।

चीन में इंटरनेट पर कड़ी सेंसरशिप के कारण आपदा से जुड़े कई वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि वहां राहत और बचाव अभियान नहीं चल रहा। बड़ी संख्या में आपातकर्मी अभियान में जुटे हैं।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी ग्लेशियल झीलों और भूस्खलन के खतरे की निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

11 सदस्यीय भारतीय टीम काठमांडू पहुंची

रसुवा में चल रहे टनल रेस्क्यू ऑपरेशन में सहायता के लिए 11 सदस्यीय भारतीय दल काठमांडू पहुंच चुका है। इस टीम में डॉक्टर, पैरामेडिक्स और रेक्की विशेषज्ञ शामिल हैं।

भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के मुताबिक पहले रेक्की ऑपरेशन की योजना बनाई जाएगी। इसके बाद टनल में फंसे लोगों को निकालने का अभियान आगे बढ़ाया जाएगा।

शी जिनपिंग ने नेपाल के राष्ट्रपति से जताया दुख

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ पर राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोग मिलकर जल्द से जल्द इस आपदा से उबरेंगे और प्रभावित लोगों को उनके घर दोबारा बसाने में मदद करेंगे।

चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार तिब्बत में अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि सप्ताहांत में भारी बारिश राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना सकती है।

मौत और लापता लोगों के आंकड़ों में अंतर क्यों?

नेपाल में बाढ़ के बाद मौत और लापता लोगों के आंकड़े लगातार बदल रहे हैं। पुलिस और राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण की ओर से अलग-अलग आंकड़े सामने आने की वजह से स्थिति को लेकर भ्रम भी पैदा हुआ है।

आपातकालीन हालात में तेजी से चल रहे रेस्क्यू अभियान, शवों की बरामदगी और नई जानकारी मिलने के कारण आंकड़ों में बदलाव संभव है। वहीं तिब्बत की स्थिति की सही जानकारी जुटाना ज्यादा मुश्किल है, क्योंकि वहां मीडिया की पहुंच सीमित है और ज्यादातर सूचनाएं चीनी सरकारी मीडिया से सामने आ रही हैं।

नेपाल में 41 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक लापता

नेपाल में लापता ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है। इनमें न्यू साउथ वेल्स के न्यूकैसल की 46 वर्षीय रेशमा पटेल भी शामिल हैं, जो ईशा फाउंडेशन के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं।

उनके दोस्त के मुताबिक रेशमा की आखिरी लोकेशन नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ आने से करीब 10 मिनट पहले की थी। उनके पति भाविन पटेल अपनी पत्नी की तलाश में नेपाल पहुंच चुके हैं।

वहीं 25 वर्षीय कारा सेवेरिनो, जिनसे पहले संपर्क नहीं हो पा रहा था, अब अपने परिवार के संपर्क में हैं।

लगातार बढ़ता खतरा

नेपाल और तिब्बत में आई फ्लैश फ्लड ने हिमालयी क्षेत्र में आपदा की भयावह तस्वीर सामने रख दी है। हजारों लोगों की तलाश अभी जारी है और मलबे के नीचे दबे लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

लेकिन ग्लेशियल झीलों में बढ़ता पानी, अस्थिर चट्टानें, भूस्खलन और संभावित नई बाढ़ ने राहत-बचाव अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि पहाड़ों में बनी अस्थायी झीलें आने वाले घंटों और दिनों में कितना खतरा पैदा करती हैं।

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