"शर्मनाक! स्कूल में पढ़ाई की जगह सफाई, शिक्षक नहीं, स्वीपर पर टिकी शिक्षा की आशा!"

ब्रेकिंग न्यूज़: सरकारी स्कूल की बदहाली पर पड़ रहा बच्चों के भविष्य का असर

सारंगढ़-बिलाईगढ़| 13 अप्रैल 2026| एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
सरसींवा के एक दूरदराज क्षेत्र में स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय गंभीर संकट से जूझ रहा है। राज्य सरकार की युक्तियुक्तकरण नीति का कोई प्रभाव यहां देखने को नहीं मिला है। इस स्कूल में न तो शिक्षकों की नियुक्ति हुई है और न ही कक्षाएं सही से चल पा रही हैं। ऐसे में, बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है, जिससे उनकी पढ़ाई और परीक्षा परिणाम पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।

प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा

ग्रामीणों की मानें तो स्कूल में कक्षा एक से पांच तक कुल 43 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन यहां एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है। एक प्रधान पाठक का नाम रिकॉर्ड में है, लेकिन वे स्वास्थ्य कारणों से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। स्कूल की शिक्षा का पूरा भार स्वीपर तिलक नेताम पर आ गया है, जो अपनी अन्य जिम्मेदारियों के साथ-साथ बच्चों को पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी का एक बड़ा उदाहरण है, जिसने बच्चों के भविष्य को संकट में डाल दिया है।

स्कूल भवन और सुविधाओं की खराब स्थिति

स्कूल का बुनियादी ढांचा भी कमजोर है। बारिश के मौसम में छत से लगातार पानी टपकता है, जिससे बच्चों के बैठने में परेशानी होती है। स्कूल में किचन शेड का अभाव है, जिसके कारण रसोइया अपने घर से खाना बनाकर लाता है। इसके अलावा, शौचालय की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि उसका उपयोग नहीं किया जा सकता है। बच्चे खुले मैदान में जाने को मजबूर हैं, जो स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिहाज से बेहद चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने कलेक्टर को आवेदन देकर स्थिति सुधारने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।

शिक्षा अधिकारियों की अनभिज्ञता और सरकार की नीतियों का सच

स्कूल की मानक स्थिति से संबंधित शिक्षा अधिकारी पूरी तरह अनभिज्ञ नजर आ रहे हैं। बीईओ एसएन साहू का कहना है कि उन्हें इस समस्या की कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। जबकि जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले को जांच का विषय बताने में ही अपनी भलाई समझी है। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विधानसभा में कहा था कि कोई स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है, लेकिन इस स्कूल की सच्चाई उनके दावों को पूरी तरह खंडित कर रही है।

निष्कर्ष

यह स्थिति न केवल बच्चों की पढ़ाई बल्कि उनके भविष्य को भी प्रभावित कर रही है। सरकारी स्कूलों की इस भयावह दशा पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि प्रशासन और सरकार इस समस्या का समाधान नहीं निकालते हैं, तो बच्चों का शिक्षा का अधिकार और उनका भविष्य संकट में पड़ जाएगा। समाज के सभी वर्गों को मिलकर इस मुद्दे को उठाने की जरूरत है ताकि स्कूल की स्थिति में सुधार हो सके और बच्चों को एक बेहतर शिक्षा मिल सके।

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