ब्रेकिंग न्यूज: हाई कोर्ट ने आवारा मवेशियों के मामले पर सुनवाई शुरू की
बिलासपुर, 24 मार्च 2026: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आवारा मवेशियों के उचित प्रबंधन को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच में बुधवार को सुनवाई हुई। इस मामले में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण निर्णय की प्रतीक्षा दी, जिसमें आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुनवाई पूरी करके निर्णय सुरक्षित रखा गया है।
आवारा मवेशियों की समस्या
आवारा मवेशियों की बढ़ती संख्या से सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं भी बढ़ रही हैं, जिसे लेकर स्थानीय नागरिकों ने हाई कोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की हैं। सड़कों पर मवेशियों के कारण होने वाली घटनाओं पर कानून की नजर रखने की कोशिश जारी है। NHAI के वकील ने सुनवाई के दौरान सुझाव दिया था कि मवेशियों पर टैग लगाकर उनके मालिक की पहचान की जा सकती है। इससे उनके उचित प्रबंधन में सहायता मिलेगी।
हाई कोर्ट की नाराजगी और सुधार के निर्देश
सुनवाई में, हाई कोर्ट ने अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने अधिकारीों से कहा कि वे योजनाएं तो बनाते हैं, लेकिन उन्हें लागू कौन कर रहा है? अंधेरे में डूबी सड़कें और बढ़ती दुर्घटनाएं स्पष्ट संकेत हैं कि सुधार की आवश्यकता है। कोर्ट ने सख्ती से निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। इनमें आवारा कुत्तों के नसबंदी और उनके शेल्टर में रखने के मुद्दे पर विचार किया गया है। हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों के कारण नागरिकों की सुरक्षा और पशु अधिकारों के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया है।
निष्कर्ष:
बिलासपुर में आवारा मवेशियों की समस्या बढ़ती जा रही है और इसके प्रभावों का सामना नागरिकों को करना पड़ रहा है। उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ही इस गंभीर समस्या के समाधान को लेकर सक्रिय हैं। उचित प्रबंधन और सख्त नियमों के पालन से ही इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। आने वाले दिनों में सुनवाई के बाद इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट दिशा निर्देश दिए जाने की उम्मीद है। यह स्थिति न केवल स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि सम्पूर्ण पशु कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण है।
