पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान के लिए कूटनीति बढ़ावा देने का चार-राष्ट्र सम्मेलन आयोजित किया

ब्रेकिंग न्यूज़: इरान पर संघर्ष जारी, इस्लामाबाद में चार देशों की उच्चस्तरीय वार्ता शुरू

इस्लामाबाद, पाकिस्तान – अमेरिका-इज़राइल युद्ध इरान पर थमने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों ओर से हमले जारी हैं, लेकिन इस बीच कूटनीति के प्रयास तेजी पकड़ रहे हैं। यह स्थिति इरान के पड़ोसी देशों को प्रभावित करने के साथ ही विश्व अर्थव्यवस्था को भी दहशत में डाल रही है।

चार देशों की उच्चस्तरीय वार्ता का आयोजन

रविवार को इस्लामाबाद में तुर्की, सऊदी अरब, मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय वार्ता शुरू हुई। यह बैठक एक ऐसे कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा है जिसे अधिकारियों ने अब तक की सबसे संगठित क्षेत्रीय कोशिश बताया है। इसका उद्देश्य अमेरिका और इरान के बीच सीधी बातचीत की संभावना को बढ़ाना है।

इस बैठक की तैयारी के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मासूद पेज़ेश्कियन के साथ 90 मिनट की फोन बातचीत की। इस बातचीत में तनाव कम करने पर चर्चा की गई और ईरान ने यह व्यक्त किया कि पिछले वार्ता प्रयासों में एक महत्वपूर्ण तत्व – विश्वास – की कमी रही है।

कूटनीतिक प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका

यह वार्ता अचानक नहीं हुई है। यह एक ऐसे तंत्र का विकास है जो इस महीने की शुरुआत में रियाद में मुस्लिम और अरब राज्यों की एक व्यापक बैठक में चर्चा की गई थी। अब यह चार देशों के बीच एक कूटनीतिक तरीके के रूप में विकसित हो गया है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है।

महल योजना के अनुसार, यह बैठक तुर्की की राजधानी अंकारा में होने वाली थी, लेकिन यह इस्लामाबाद स्थानांतरित हो गई। पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका तथा चीन का समर्थन इन प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।

क्या वे इरान और अमेरिका के बीच बातचीत करवा सकते हैं?

चार-राष्ट्र बैठक का उद्देश्य खुद संघर्ष विराम की घोषणा नहीं करना है। इसका मुख्य लक्ष्य क्षेत्रीय रुख को समरूप करना और अमेरिका-इरान संवाद के लिए भूमि को तैयार करना है। अब विश्व इस प्रक्रिया के परिणाम का इंतजार कर रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, यदि मौजूदा संवाद जारी रहता है, तो अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची के बीच इस्लामाबाद में बातचीत हो सकती है। एक राजनयिक ने कहा कि किसी भी बैठक के लिए अमेरिका को इरान की मांग का सम्मान करने हेतु अस्थायी रूप से हवाई हमलों को रोकना पड़ सकता है।

तेहरान की अपेक्षाएँ

चार-राष्ट्र बैठक का मुख्य उद्देश्य ईरान का जवाब सुनना और अमेरिका को संदेश भेजना है। ईरान ने पहले ही इस प्रक्रिया में अपने जवाब इस्लामाबाद के माध्यम से भेज दिए हैं। तेहरान की मांगों में हिंसा को समाप्त करना, क्षतिपूर्ति की मांग, भविष्य में हमलों से सुरक्षा तथा होर्मुज का सामरिक महत्त्व शामिल हैं।

इस्लामाबाद बैठक का एजेंडा

फोन वार्ता के दौरान, राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने चेतावनी दी कि इज़राइल क्षेत्र के अन्य देशों में संघर्ष को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। इस्लामाबाद का मानना है कि वार्ता का उद्देश्य सामूहिक सम्मान की भावना से होनी चाहिए और ईरानी अधिकारियों तथा नागरिकों की हत्या को समाप्त किया जाना चाहिए।

हालांकि, यह वार्ता अमेरिका या ईरान के अधिकारियों को शामिल नहीं करती है। यह केवल एक तैयारी है, जिसका मूल उद्देश्य क्षेत्रीय समर्थन को एकजुट करना है।

अगले 48 से 72 घंटों में यह तय होगा कि क्या इस कूटनीतिक प्रयास से वास्तविक बातचीत हो सकती है। अब यह तय होगा कि क्या इस्लामाबाद में आयोजित प्रयास सफल होंगे या नहीं।

निष्कर्ष: इस्लामाबाद की बैठक से स्पष्ट होता है कि इस संघर्ष का कूटनीतिक दारोमदार अब पाकिस्तान की राजधानी पर है। यदि यह प्रयास विफल होता है, तो क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक संकट में बदल सकता है।

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