मार्गशीर्ष पर पढ़िए डॉ नीरज गजेंद्र का विशेष आलेख शांत प्रकृति में मुखर होती आत्मा

अगहन महीना

sitename%डॉ. नीरज गजेंद्र

ऋतुओं के इस चक्र में प्रकृति ने अपनी हरियाली समेटकर शांति की चादर ओढ़ ली है। इसके साथ ही भारत की सनातन संस्कृति ने भी एक और जागरण का पर्व मनाना शुरू कर दिया है। कार्तिक पूर्णिमा के स्नान और दीपदान के बाद मार्गशीर्ष का महीना प्रारंभ हो गया है। मार्गशीर्ष यानी अगहन।  जी हां, यह महीना मनुष्य और देवी-देवता, श्रद्धा-साधना के साथ बाह्य शीतलता और अंतर्मन की ऊष्मा के संगम का काल है। यह वह कालखंड है जब उत्तर भारत यानि देवभूमि की सर्द हवाएं मनुष्य को भीतर तक छू रही होती हैं। श्रद्धा की ऊष्मा से भरे मन में मां महालक्ष्मी के स्वागत का उत्साह ठंड को भी मात देता है। मार्गशीर्ष मास को वेदों और पुराणों में धन, समृद्धि, पुण्य और सात्त्विकता का प्रतीक कहा गया है। श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि मासानां मार्गशीर्षोऽहम्, अर्थात महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं। यह कथन अपने आप में इस मास की दिव्यता का उद्घोष है। यह महीना ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव कराता है। यही कारण है कि इस महीने में प्रकृति शांत और आत्मा बोलती है।

सनातन परंपरा में मार्गशीर्ष को लक्ष्मी-उपासना का काल कहा गया है। यह वह समय है जब हर घर में ठिठुरन के बावजूद प्रातःकाल की आरती गूंजती है। महिलाएं ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर गाय के गोबर से आंगन लीपती हैं। अल्पना बनाती हैं और दीपक जलाती हैं। यह सब परंपरा के साथ आत्मानुशासन का अभ्यास भी है। मार्गशीर्ष के महालक्ष्मी व्रत का जुड़ाव गहरा और बहुआयामी है। पौराणिक आधार पर इस व्रत का मूल लक्ष्मी पुराण में निहित है। इसे सुदर्शा व्रत के नाम से संबोधित किया गया है। पुराणों में वर्णित है कि स्वयं मां महालक्ष्मी ने इस व्रत की महिमा का बखान किया है। यह व्रत दरिद्रता का नाश कर धन, संतान, ऐश्वर्य और कीर्ति प्रदान करता है। लक्ष्मी पुराण की कथा बताती है कि कैसे एक गरीब महिला ने श्रद्धापूर्वक यह व्रत करके समस्त सुख प्राप्त किए, और कैसे एक राज्य की गर्वीली रानी ने व्रत का अपमान कर अपना सारा वैभव खो दिया। यह कथा इस तथ्य को स्थापित करती है कि महालक्ष्मी अहंकार या बाह्य आडंबर को तिरस्कृत कर विनम्रता, श्रद्धा और कर्म से प्रसन्न होती हैं। यह विधान समाज के हर वर्ग को समान रूप से समृद्धि प्राप्त करने का अवसर देता है।

वास्तव में ठिठुरती ठंड में भी पूजा-पाठ का संदेश संयम का विज्ञान है। मार्गशीर्ष की ठंड हमें भीतर की साधना सिखाती है। जब शरीर ठंड से सिकुड़ता है, तब आत्मा अपने भीतर की ऊष्मा खोजती है। इसीलिए इस मास में तप, व्रत और संयम का विशेष महत्त्व है। ब्रह्ममुहूर्त में स्नान, दीपदान और गोबर से लीपन इन सब धार्मिक क्रियाओं से ऊर्जा का संतुलन बनता है। आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि इन क्रियाओं से वातावरण में नकारात्मक आयन नष्ट होते हैं और मन की एकाग्रता बढ़ती है। शास्त्रोक्त और वेदांत दृष्टिकोण से देखें तो वेदों में लक्ष्मी को श्री कहा गया है। श्री का अर्थ है ऐश्वर्य और सौंदर्य का संगम, वृद्धि, विस्तार और प्रसन्नता का एक रूप है। श्रीसूक्त में वर्णित है पद्मिनीं पद्मपत्रां च पद्मप्रीयां पद्मालयाम् अर्थात जो व्यक्ति कमल की भांति निर्मल, संतुलित और समर्पित जीवन जीता है, वही सच्ची लक्ष्मी की कृपा का अधिकारी बनता है।

श्रीसूक्त का ही एक और मंत्र कहता है हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। यह हिरण्य अर्थात स्वर्णवर्ण बाहरी नहीं, आत्मा की आभा का प्रतीक है। जो व्यक्ति अपने भीतर के स्वर्णरूपी विवेक और सद्गुणों को चमकाता है, वही लक्ष्मी का वास्तविक उपासक है। अगहन का महीना इस आध्यात्मिक भाव को जाग्रत करता है। ठंड का यह समय हमें संयम और अनुशासन सिखाता है। यह बताता है कि सुख-सुविधाओं की प्रतीक्षा किए बिना भी श्रद्धा और कर्मयोग के माध्यम से लक्ष्मी को प्रसन्न किया जा सकता है। आज जब हमारी दिनचर्या की गति तेज हो चली है और मन की शांति दुर्लभ सी लगती है, तब मार्गशीर्ष हमें सोचने की प्रेरणा देता है कि क्या समृद्धि केवल भौतिक संपन्नता से आती है। क्या लक्ष्मी की आराधना सिर्फ धन की आकांक्षा है  या यह उस संतुलन की खोज है जिसमें श्रम और विश्राम, भोग और योग, धन और धर्म का समन्वय हो। मार्गशीर्ष का संदेश है कि धन से बंधने के बजाय धन को साधो। भक्ति और व्यवहार के बीच संतुलन ही सच्चा जीवन है। जब व्यक्ति अपनी इच्छाओं को मर्यादा में रखता है और अपने कर्म को निष्काम बनाता है, तब वही लक्ष्मी का प्रिय होता है। श्रद्धा तभी सार्थक है जब वह साधना बन जाए।

आज जब आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मनुष्य थक चुका है, तब मार्गशीर्ष का महीना एक आध्यात्मिक विश्राम का अवसर है। यह हमें बताता है कि समृद्धि बैंक बैलेंस या वस्त्राभूषण में नहीं, मानसिक शांति और पारिवारिक समरसता में है। जब महिलाएं सुबह-सुबह ठंड में उठकर दीपक जलाती हैं, तो वे परंपरा नहीं, ऊर्जा-विज्ञान की एक शाश्वत प्रक्रिया को दोहरा रही होती हैं। दीयों की लौ, गाय के गोबर से बनी सतह और मंत्रों की ध्वनि ये सभी मिलकर वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर देती हैं। ग्रंथ कहते हैं कि जो व्यक्ति पूरे मार्गशीर्ष मास में नियमपूर्वक महालक्ष्मी का पूजन करता है, उसके जीवन में स्थिरता आती है। यह स्थिरता धन और वैभव के साथ विचार, व्यवहार और भावनाओं में भी होती है। कहा गया है यत्र लक्ष्मीः तत्र धर्मः, यत्र धर्मः तत्र जयः। जहां लक्ष्मी का वास होता है, वहां धर्म, नीति और विजय अपने आप आती हैं। इसलिए अगहन मास मां लक्ष्मी को बुलाने और अपने भीतर शुद्ध विचार तथा समृद्ध कर्म के बीज बोने का महीना है।

(लेखक सामाजिक और राजनीतिक विषयों के गहन विश्लेषक, विचारशील पत्रकार और समकालीन विमर्श के सजग दृष्टा हैं)

6 नवंबर 2025 का राशिफल: मेष से मीन तक जानिए आज किस राशि पर बरसेगी किस्मत, कौन रहेगा सतर्क

महासमुंद में श्रम विभाग की बड़ी कार्रवाई: मजदूरों के अवैध पलायन पर रोक, ठेकेदारों पर FIR और लाइसेंस रद्द करने की तैयारी

 

ये भी पढ़ें...

webmorcha

Mithun Rashifal 2024: मिथुन राशि के जातकों के लिए कैसा होगा नया वर्ष, जानें राशिफल

#शुक्रग्रह #गजलक्ष्मीयोग #शुक्रवार_विशेष #शुक्र_गोचर #शुक्र_का_प्रभाव #राशिफल2025 #JyotishInHindi #BhagyaUday #AstrologyToday #ShukraGrahaअगहन महीनाज़िंदगीनामा : डॉ. नीरज गजेंद्रडॉ. नीरजमहालक्ष्मीमहासमुंदमार्गशीर्षविशेष गुरुवारश्रीकृष्ण
webmorcha

Kark Rashifal 2024: कर्क राशि के जातकों के लिए कैसा होगा नया वर्ष, जानें राशिफल

#शुक्रग्रह #गजलक्ष्मीयोग #शुक्रवार_विशेष #शुक्र_गोचर #शुक्र_का_प्रभाव #राशिफल2025 #JyotishInHindi #BhagyaUday #AstrologyToday #ShukraGrahaअगहन महीनाज़िंदगीनामा : डॉ. नीरज गजेंद्रडॉ. नीरजमहालक्ष्मीमहासमुंदमार्गशीर्षविशेष गुरुवारश्रीकृष्ण
webmorcha

Vrishabha Rashifal 2024: वृषभ राशि के जातकों के लिए कैसा होगा वर्ष 2024, जानें राशिफल

#शुक्रग्रह #गजलक्ष्मीयोग #शुक्रवार_विशेष #शुक्र_गोचर #शुक्र_का_प्रभाव #राशिफल2025 #JyotishInHindi #BhagyaUday #AstrologyToday #ShukraGrahaअगहन महीनाज़िंदगीनामा : डॉ. नीरज गजेंद्रडॉ. नीरजमहालक्ष्मीमहासमुंदमार्गशीर्षविशेष गुरुवारश्रीकृष्ण
webmorcha

Mesh Rashifal 2024: मेष राशि के जातकों के लिए कैसा होगा साल, जानें राशिफल

#शुक्रग्रह #गजलक्ष्मीयोग #शुक्रवार_विशेष #शुक्र_गोचर #शुक्र_का_प्रभाव #राशिफल2025 #JyotishInHindi #BhagyaUday #AstrologyToday #ShukraGrahaअगहन महीनाज़िंदगीनामा : डॉ. नीरज गजेंद्रडॉ. नीरजमहालक्ष्मीमहासमुंदमार्गशीर्षविशेष गुरुवारश्रीकृष्ण
webmorcha

sinh raashi 2024: सिंह राशि के जातकों के लिए कैसा रहेगा साल 2024, जानें सालभर का राशिफल

#शुक्रग्रह #गजलक्ष्मीयोग #शुक्रवार_विशेष #शुक्र_गोचर #शुक्र_का_प्रभाव #राशिफल2025 #JyotishInHindi #BhagyaUday #AstrologyToday #ShukraGrahaअगहन महीनाज़िंदगीनामा : डॉ. नीरज गजेंद्रडॉ. नीरजमहालक्ष्मीमहासमुंदमार्गशीर्षविशेष गुरुवारश्रीकृष्ण
[wpr-template id="218"]