दिलीप शर्मा, महासमुंद। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी संपन्न होने के बाद इस बार महासमुंद जिले में अवैध धान तस्करी पर कड़ी कार्रवाई का असर साफ नजर आ रहा है। खरीदी समाप्त हुए लगभग 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन तस्करों के वाहन और जब्त धान अब तक नहीं छूट पाए हैं।
जहां पूर्व वर्षों में तस्कर मंडी शुल्क जमा कर कुछ ही दिनों में अपने वाहन और धान छुड़ा लेते थे, वहीं इस बार प्रशासन की सख्ती के चलते प्रक्रिया पूरी तरह बदल गई है। अब भौतिक सत्यापन और उच्च अधिकारियों के निर्देश के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा रही है, जिससे अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग सके।
इस संबंध में कृषि उपज मंडी के सचिव दिनेश कुमार साहू ने बताया कि “पहली बार ऐसा हो रहा है कि धान तस्करों को वाहन छुड़ाने में इतनी मशक्कत करनी पड़ रही है। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर ही मंडी शुल्क लेकर वाहन और धान छोड़ा जाएगा।”
कलेक्टर विनय लंगेह के निर्देशन में राजस्व, खाद्य, मंडी और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम द्वारा अंतरराज्यीय सीमाओं पर 16 जांच चौकियां स्थापित कर सतत निगरानी की गई। इसके परिणामस्वरूप अवैध धान परिवहन एवं भंडारण के 399 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें 1,69,862 क्विंटल धान जब्त किया गया। जबकि पिछले वर्ष केवल 184 प्रकरणों में 12,828.15 क्विंटल धान की जब्ती हुई थी।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में स्थानीय किसानों के दस्तावेज सही पाए गए, उनके धान को प्राथमिकता के साथ छोड़ा गया है। वहीं, अंतरराज्यीय तस्करी से जुड़े मामलों में सख्त रुख अपनाया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लग सके।
इधर, मंडी में जब्त धान के रखरखाव को लेकर भी चिंता सामने आ रही है, जहां लंबे समय से पड़े धान को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
अवैध धान परिवहन के मामलों में महासमुंद जिला इस बार प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा है। शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया जिले में पारदर्शिता, अनुशासन और संतुलन के साथ संपन्न हुई है।
कुल मिलाकर, प्रशासन की सख्ती से जहां तस्करों पर शिकंजा कसा है, वहीं वास्तविक किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।



















