ज़िंदगीनामा। डॉ. नीरज गजेंद्र, वरिष्ठ पत्रकार
आज की समस्याएं जितनी जटिल है। उतनी ही सरल उसका समाधान है। यह मैं नहीं कह रहा हूँ। अल्बर्ट आइंस्टीन का सिद्धांत यह कहता है। आइंस्टीन, विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐसा नाम है, जो हर समय प्रासंगिक रहेगा। सापेक्षता के सिद्धांत से उन्होंने न केवल भौतिकी में क्रांति लाई, बल्कि यह भी बताया कि इंसानी सोच की सीमाएं असीमित हैं। उनकी सोच और सिद्धांत आज भी हमें सिखाते हैं कि नई दृष्टि से समस्याओं को देखा जाए।
आज जलवायु परिवर्तन, तकनीकी विषमताएं और वैश्विक असमानता का समाधान खोजने के लिए हमें आइंस्टीन के विचारों को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा था हम अपनी समस्याओं का समाधान उसी सोच से नहीं कर सकते, जिससे वे पैदा हुई हैं। यह वाक्य हमें सिखाता है कि बदलाव लाने के लिए सोच में क्रांति लानी होगी।
आइंस्टीन का जीवन भी सादगी और जिज्ञासा का आदर्श है। उन्होंने हमेशा सवाल पूछने पर जोर दिया। यह आदत आज की पीढ़ी को सिखा सकती है कि वे समस्याओं पर गहराई से सोचें और समाधान खोजें। उन्होंने इस बात को बार-बार दोहराया कि जिज्ञासा ज्ञान की पहली सीढ़ी है। यदि हम सवाल पूछने से डरेंगे, तो नए समाधान तक नहीं पहुंच पाएंगे।
उनका एक और महत्वपूर्ण सिद्धांत था — ज्ञान का उद्देश्य सिर्फ जानकारी इकठ्ठा करना नहीं, बल्कि उसे समाज के भले के लिए उपयोग करना है। आज जब तकनीक तेज गति से आगे बढ़ रही है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, तब यह विचार और भी अहम हो जाता है। उन्होंने परमाणु बम के विनाशकारी प्रभावों के खिलाफ चेतावनी दी और इसे मानवता के लिए एक बड़ा खतरा बताया।विज्ञान और प्रौद्योगिकी का सही उपयोग तभी संभव है जब हम उसमें नैतिकता को प्राथमिकता दें।
आइंस्टीन का यह विचार कि कल्पना ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण है, हमें यह सिखाता है कि समस्याओं का समाधान सिर्फ तथ्यों और आंकड़ों से नहीं होता, हमें कल्पनाशक्ति का भी सहारा लेना चाहिए। उनकी यह सोच हमें प्रेरित करती है कि असंभव को संभव बनाने के लिए खुले दिमाग से सोचना जरूरी है।
आइंस्टीन की सबसे बड़ी ताकत थी उनकी सरलता। वे जटिल सिद्धांतों को भी सरल भाषा में समझाने की क्षमता रखते थे। यह गुण हमें सिखाता है कि चाहे समस्या कितनी भी कठिन क्यों न हो, उसे सरल दृष्टिकोण से सुलझाने का प्रयास करना चाहिए।
आज और आने वाली पीढ़ी के लिए अल्बर्ट आइंस्टीन सिर्फ एक वैज्ञानिक नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक हैं। उनकी सोच और जीवन हमें यह प्रेरणा देते हैं कि हम अपनी समस्याओं को नए नजरिए से देखें और समाधान ढूंढें। उनकी शिक्षाएं न केवल विज्ञान, बल्कि हर क्षेत्र में हमें नई दिशा देती हैं।
आइंस्टीन के विचारों और सिद्धांतों को अपनाकर हम अपने समय की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि निरंतर सीखना और प्रश्न पूछना ही प्रगति की कुंजी है। उनके ये अमूल्य विचार हमेशा हमें प्रेरित करते रहेंगे।
आज, मैं आइंस्टीन की बात इसलिए कर रहा हूँ, क्योंकि आज के युग में लोग अपने आप से सवाल पूछने के बजाय दूसरों के पास समाधान खोजने में लगे हुए हैं। यह खोजी व्यक्तित्व और उनके विचार समस्याग्रस्त लोगों को उनके अंदर निहित समाधान तक पहुँचाने में मददगार होगा।
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