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महासमुंद में आदिवासी छात्रावास की बदहाली: 13 सिंगल बेड में 32 बच्चों को सुलाया जा रहा

दिलीप शर्मा. महासमुंद। जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों की हकीकत बेहद चिंताजनक सामने आ रही है। बागबाहरा ब्लॉक के वनांचल क्षेत्र स्थित प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति छात्रावास, हाथीबाहरा में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं। यह छात्रावास प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति कार्यालय के भवन में संचालित हो रहा है, जहां कुल 32 बच्चों की दर्ज संख्या है, लेकिन सोने के लिए सिर्फ 13 सिंगल बेड उपलब्ध हैं।

स्थिति इतनी गंभीर है कि कई बेड पर दो-दो बच्चों को सोना पड़ रहा है, वहीं शेष बच्चों के सोने की व्यवस्था कैसे की जाती है, यह अपने आप में बड़ा सवाल बन गया है। भीड़ और संसाधनों की कमी के कारण बच्चों को असुविधाजनक हालात में रात गुजारनी पड़ रही है।

अधीक्षक पर दोहरी जिम्मेदारी, 15 किलोमीटर का रोज़ाना सफर

छात्रावास में पदस्थ अधीक्षक श्रवण कुमार यादव पर भी दोहरी जिम्मेदारी है। वे एक ओर घोटियापानी स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं, वहीं दूसरी ओर इसी छात्रावास का संचालन भी उन्हीं के जिम्मे है। अधीक्षक रोजाना 15 किलोमीटर दूर बागबाहरा से आना-जाना करते हैं। ऐसे में स्कूल और छात्रावास दोनों की जिम्मेदारी एक साथ कैसे निभाई जा रही है, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस संबंध में अधीक्षक श्रवण कुमार यादव का कहना है कि “यह स्थिति सिर्फ हाथीबाहरा छात्रावास की नहीं है, बल्कि जिले के अधिकांश छात्रावासों में भवन और बेड की भारी कमी है। मजबूरी में बच्चों को ऐसे ही सोना पड़ रहा है।”

प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति छात्रावास, हाथीबाहरा
प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति छात्रावास, हाथीबाहरा

सवालों के घेरे में विभाग

आदिवासी बच्चों के आवास, सुरक्षा और सुविधा को लेकर सरकार द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान देगा, या फिर आदिवासी छात्र ऐसे ही अव्यवस्थाओं में पढ़ने और रहने को मजबूर रहेंगे।

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