❄️ 2025-26 की सर्दी होगी हाड़ कंपाऊ! ला नीना के असर से उत्तर भारत में बढ़ेगा ठंड का कहर

🌍 ला नीना क्या है और कैसे प्रभावित करती है मौसम को?

ला नीना एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से नीचे चला जाता है। इससे हवा, दबाव और वर्षा पैटर्न प्रभावित होते हैं। यह अल नीनो के उलट असर डालती है और ग्रह को ठंडा करती है।


📉 मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी: उत्तर भारत में गिरेगा पारा

  • दिल्ली, एनसीआर और हिमालयी इलाकों में सामान्य से कम तापमान दर्ज हो सकता है।

  • न्यूनतम तापमान 2–3 डिग्री सेल्सियस तक गिरने की संभावना।

  • शीत लहर (Cold Wave) की स्थिति और भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है।


🔎 विशेषज्ञों की राय: सर्दी सामान्य से ज्यादा ठंडी होगी

  • IMD प्रमुख एम. मोहपात्रा – जल्द ही तापमान पूर्वानुमान जारी करेंगे।

  • महेश पलावत (स्काईमेट वेदर) – ला नीना और गंभीर सर्दियों का सीधा संबंध नहीं, लेकिन ठंड सामान्य से जरूर ज्यादा होगी।

  • एम. राजीवन (पूर्व सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय) – ग्लोबल वार्मिंग ला नीना के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित कर सकती है।


🏔️ पश्चिमी विक्षोभ और शुरुआती बर्फबारी

4 अक्टूबर से पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करेगा, जिससे बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू हो सकता है।


🌾 खेती पर असर: रबी फसलें रहेंगी प्रभावित

  • ठंड से गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलें प्रभावित हो सकती हैं।

  • हालांकि, मानसून की मजबूती कृषि को सकारात्मक लाभ भी दे सकती है।


⚠️ WMO की चेतावनी

मानव-जनित जलवायु संकट (Global Warming) ला नीना जैसी प्राकृतिक घटनाओं को और जटिल बना रहा है। इससे चरम मौसम (Extreme Weather) का खतरा बढ़ रहा है।


👉 निचोड़:
2025-26 की सर्दी उत्तर भारत के लिए बीते दशकों की सबसे ठंडी सर्दियों में से एक हो सकती है। दिल्ली-एनसीआर, हिमालयी राज्य और आसपास के क्षेत्र कड़ाके की ठंड झेलने के लिए तैयार रहें।

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