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जून में लिपुलेख पास से भारत-चीन सीमा व्यापार फिर से शुरू होगा

ब्रेकिंग न्यूज: भारत-चीन के बीच ऐतिहासिक व्यापार फिर से शुरू होने जा रहा है!
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में लिपुलेख पास के माध्यम से व्यापार की बहाली, 7 सालों के बाद हुई है तय।

भारत-चीन व्यापार का मार्ग प्रशस्त

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में लिपुलेख पास के माध्यम से भारत और चीन के बीच ऐतिहासिक सीमा पार व्यापार इस जून में पुनः शुरू होने जा रहा है। यह व्यापार कोविड-19 महामारी के चलते पिछले 7 वर्षों से स्थगित था।

हाल ही में, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत के बाद इस निर्णय की घोषणा की गई। दोनों देशों ने हिमालयी व्यापार मार्गों के फिर से खोलने पर सहमति जताई है, जिसमें हिमाचल प्रदेश के शिपकी ला और सिक्किम के नाथू ला शामिल हैं।

स्थानीय प्रशासन का सक्रिय सहयोग

जिला मजिस्ट्रेट आशीष भटगाई ने इस समाचार पत्र से बातचीत में पुष्टि की है कि व्यापार सत्र की व्यवस्था के लिए स्थानीय प्रशासनिक तैयारियाँ चल रही हैं। यह व्यापार सत्र आमतौर पर जून से सितंबर तक होता है, और अक्टूबर तक भी बढ़ सकता है।

उन्होंने कहा, "हमने सभी संबंधित पक्षों और स्थानीय समुदाय के साथ तैयारी बैठकें शुरू कर दी हैं। यह एक सकारात्मक कदम है, क्योंकि 2019 के बाद व्यापार फिर से शुरू हो रहा है।" भटगाई ने बताया कि धारचूला के उप-मंडल अधिकारी को ऑपरेशनों की निगरानी के लिए प्रमुख व्यापार अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है।

विदेश मंत्रालय से मिली हरी झंडी

इस व्यापार के फिर से शुरू करने की अनुमति मिलने के बाद, विदेश मंत्रालय ने एक औपचारिक नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया। भटगाई के अनुसार, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस दिशा-निर्देश को उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन को बताया है। गृह मंत्रालय और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने भी इस पुनः आरम्भ करने की स्वीकृति दी है।

यह कदम न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि भारत-चीन के रिश्तों में भी एक नयी जान फूंक सकता है। यह व्यापार द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के संकेत दे सकता है और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा।

साथ ही, यह कदम स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगा और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा dará। कई व्यापारी और स्थानीय लोग इस व्यापार बहाली के लिए उत्सुक हैं और इसे अपने लिए एक अवसर मानते हैं।

हिमालयी क्षेत्र में व्यापार की बहाली, दोनों देशों के बीच समझदारी और आपसी सहयोग का प्रतीक है। अब सभी की नजरें इस व्यापार सत्र पर हैं, जो क्षेत्रीय विकास और द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा का संचार करेगा।

निष्कर्ष

भारत और चीन के बीच लिपुलेख पास के माध्यम से होने वाला यह व्यापार, इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा सकता है। स्थानीय प्रशासन एवं भारत सरकार की तरफ से किए गए प्रयासों का परिणाम, निश्चित रूप से सकारात्मक प्रभाव डालेगा। इस व्यापार के माध्यम से, न केवल दोनों देशों के बीच संबंधों में मजबूती आएगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।

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