ताज़ा खबर: छत्तीसगढ़ में नए मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन
रायपुर। 21 मार्च 2026 – छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रदेश के पांच शहरों में नए चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना की घोषणा की है। इस निर्णय के तहत, राज्य सरकार ने इन मेडिकल कॉलेजों के लिए डीन की नियुक्ति भी कर दी है। हालाँकि, अधिक पढ़ाई और निरीक्षण के लिए एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) इस महीने राज्य के मौजूदा मेडिकल कॉलेजों का दौरा करेगी।
मेडिकल कॉलेजों की कमी और नई नियुक्तियाँ
इस निर्णय के बाद, प्रदेश के पुराने चिकित्सा महाविद्यालयों में फैकल्टी की भारी कमी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में, राज्य में 10 चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सकों के 2660 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से 1290 पद अब भी खाली हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब पुराने महाविद्यालयों में फैकल्टी की कमी है, तो नए कॉलेजों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती कैसे संभव होगी।
नए मेडिकल कॉलेजों का स्थान
राज्य सरकार ने ज्ञान वर्धन के लिए कवर्धा, मनेंद्रगढ़, जांजगीर-चांपा, गीदम (दंतेवाड़ा) और कुनकुरी (जशपुर) में नए चिकित्सा महाविद्यालय खोलने का निर्णय लिया है। हालाँकि, इन कॉलेजों के लिए अभी तक फैकल्टी की नियुक्ति नहीं हो पाई है। यह भी संभावना है कि दंतेवाड़ा और जशपुर के जिला अस्पताल एनएमसी के निरीक्षण के दौरान संबद्ध अस्पतालों के रूप में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। हालांकि, कुनकुरी और जशपुर के बीच की दूरी 50-52 किलोमीटर होने के कारण मान्यता में कुछ समस्याएँ आ सकती हैं।
असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया
राज्य सरकार ने सीजी पीएससी (छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग) के माध्यम से 125 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती की योजना बनाई है। यह इंटरव्यू प्रक्रिया 28 मार्च तक चलने वाली है। इंटरव्यू के बाद चयनित उम्मीदवारों को जल्द ही जॉइनिंग के लिए कहा जाएगा। इसके साथ ही, यह भी ध्यान देने योग्य है कि कॉलेजों में अभी भी 332 असिस्टेंट प्रोफेसरों के पद रिक्त हैं, जिनकी भर्ती के लिए केवल 7 सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों की भर्ती की जा रही है, जिनमें से दो कार्डियोलॉजी के पद शामिल हैं।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना का यह कदम प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा में ले जाने वाला है, लेकिन इससे उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का समाधान करना भी आवश्यक होगा। वर्तमान में फैकल्टी की कमी और नए कॉलेजों में डॉक्टरों की नियुक्ति की आवश्यकता इस प्रक्रिया को कठिन बना सकती है। प्रदेश सरकार को इन मुद्दों का समाधान करने के लिए तत्पर रहना होगा, ताकि नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध हो सकें।
