ब्रेकिंग न्यूज़: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने किया पंच कुंडीय रुद्र महायज्ञ में शामिल
रायपुर। आज चैत्र नवरात्रि की पावन चतुर्थी तिथि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कबीरधाम जिले के ग्राम जुनवानी में आयोजित पंच कुंडीय रुद्र महायज्ञ एवं शिव महापुराण कथा में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने यज्ञ की विधि-विधान से परिक्रमाकर व्यासपीठ की पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना की।
धार्मिक अनुष्ठान में मुख्यमंत्री का अभिवादन
मुख्यमंत्री साय ने उपस्थित श्रद्धालुओं का आत्मीय अभिवादन करते हुए सभी को चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस यज्ञ में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। साय ने साहू समाज की प्रशंसा की, जो सदैव समाज को दिशा देने का कार्य करता रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि दानवीर भामाशाह और पूज्य सत्यनारायण बाबा जैसी महान विभूतियां इसी समाज से थीं, जो मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, "जब कोई समाज संगठित होकर कार्य करता है, तो इसका लाभ केवल उस समाज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे पूरे राष्ट्र का विकास होता है।" उन्होंने साहू समाज को संगठित और सशक्त रहने की प्रेरणा दी।
छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक विरासत
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ संत-महात्माओं की तपोभूमि है और यहां आयोजित रुद्र महायज्ञ से श्रद्धालुओं को विशेष आशीर्वाद मिलेगा। "यह माता कौशल्या का मायका है," उन्होंने कहा, "भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का अधिकांश समय इसी धरती पर बिताया।"
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार द्वारा "रामलला दर्शन योजना" चलाई जा रही है, जिसके अंतर्गत 40 हजार से अधिक रामभक्त अयोध्या जाकर दर्शन कर चुके हैं।
समाज के कमजोर वर्ग की सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने विधानसभा के बजट सत्र में "छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक" पेश करने का भी उल्लेख किया, जो समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह कानून सुनिश्चित करेगा कि किसी भी प्रकार के छल, प्रलोभन या दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन न हो सके।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं विधायक भावना बोहरा ने भी यज्ञ की महत्ता और धार्मिक आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया।
निष्कर्ष
इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने न केवल धार्मिक आस्था को मज़बूती देने का कार्य किया, बल्कि समाज के विकास और एकता का भी संदेश दिया। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर एवं समाज के प्रति सरकार की संवेदनशीलता इस आयोजन के जरिए प्रकट हुई है। इस प्रकार के आयोजन न केवल धार्मिकता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि समाज में एकता और सद्भाव का संचार भी करते हैं।



Recent Comments