ब्रेकिंग न्यूज़: छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन पर हाई कोर्ट का संज्ञान
बिलासपुर, 14 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के कार्यों में लापरवाही और नागरिकों की कठिनाइयों को देखते हुए, बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका की सुनवाई शुरू की है। इस मामले में डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार से जानकारी मांगी है कि राज्य शासन को जल जीवन मिशन के कार्यों के लिए 536 करोड़ रुपए की राशि दी गई है। अगली सुनवाई 7 मई को होगी।
केंद्र का बयान और जल आपूर्ति की स्थिति
ताजा मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि छत्तीसगढ़ के रायगढ़, दुर्ग, बस्तर और अंबिकापुर जिलों में जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन और अन्य सुविधाएं स्थापित की गई हैं, लेकिन समस्या यह है कि इन स्थानों पर पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। चीफ जस्टिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जनहित याचिका के रूप में इसकी सुनवाई प्रारंभ की। इस क्रम में, केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने डिवीजन बेंच को जल जीवन मिशन से संबंधित पत्र प्रस्तुत किया।
जल जीवन मिशन के लिए पत्र में निर्देश
केंद्र सरकार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि जल जीवन मिशन के विस्तार के लिए आवश्यक धनराशि सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद ही जारी की जाएगी। हालांकि, राज्य को यह निर्देश दिया गया है कि वह अपने संसाधनों से काम करता रहे। पत्र में कहा गया कि राज्य को जल्द ही उचित धनराशि दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी और कार्यान्वयन
हाई कोर्ट में पेश किए गए अन्य पत्र में बताया गया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन के विस्तार को दिसंबर 2028 तक मंजूरी दे दी है। इसमें न केवल बढ़ी हुई धनराशि है, बल्कि ग्रामीण पेयजल आपूर्ति क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों पर भी ध्यान दिया गया है। मार्च 2026 में छत्तीसगढ़ के लिए 536.53 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है।
निष्कर्ष
इस प्रकार, जल जीवन मिशन के कार्यों में लापरवाही की समस्या को हल करने के लिए हाई कोर्ट ने कदम उठाया है। राज्य शासन को निर्देश दिया गया है कि वह अगले सुनवाई में शपथपत्र प्रस्तुत करे, जिसमें बताया जाए कि इस राशि का उपयोग कैसे किया जाएगा। यह मामला केवल जल आपूर्ति की स्थिति ही नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन में सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण है। अगली सुनवाई 7 मई को निर्धारित की गई है, जिसमें इस मामले पर आगे की जानकारी प्राप्त होगी।